छात्राओं के लिए शौचालयों की कमी संबंधी याचिका पर दूसरी पीठ करेगी सुनवाई: न्यायालय

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छात्राओं के लिए शौचालयों की कमी संबंधी याचिका पर दूसरी पीठ करेगी सुनवाई: न्यायालय

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 03:03 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 03:03 PM IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को निर्देश दिया कि सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए स्वच्छता सुविधाओं की कथित कमी को उजागर करने वाली जनहित याचिका को उस पीठ के समक्ष रखा जाए, जिसने पहले एक महत्वपूर्ण फैसले में मासिक धर्म स्वास्थ्य को जीवन और शिक्षा के मौलिक अधिकार का हिस्सा माना था।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार के साथ-साथ विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों समेत अन्य प्राधिकारियों के खिलाफ रीपक कंसल द्वारा दायर याचिका में रखी गई दलीलों का संज्ञान लिया।

सीजेआई ने कहा कि उच्चतम न्यायालय पहले ही याचिका में उठाए गए मुद्दों से संबंधित एक व्यापक फैसला सुना चुका है। उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील से पहले के फैसले और उसमें दिए गए निर्देशों का अध्ययन करने को कहा।

वकील ने नीति आयोग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देशभर में 98,000 से अधिक स्कूलों में अब भी छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि वह मौजूदा याचिका पर आगे बढ़ने से पहले उच्चतम न्यायालय के पहले के फैसले में दिए गए निर्देशों का अध्ययन करेंगे।

इसके बाद पीठ ने कहा कि 30 जनवरी को न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ पहले ही इस मुद्दे पर विस्तृत फैसला सुना चुकी है। इसलिए वर्तमान जनहित याचिका पर भी उसी पीठ द्वारा सुनवाई किया जाना उचित होगा।

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने 30 जनवरी के फैसले में संविधान के तहत मिले जीवन और शिक्षा के अधिकार के रूप में गरिमापूर्ण मासिक धर्म स्वास्थ्य के अधिकार को मान्यता दी थी।

लैंगिक न्याय और शैक्षणिक समानता को बढ़ावा देने वाले इस महत्वपूर्ण फैसले में शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि हर स्कूल चाहे वह सरकारी, सहायता प्राप्त या निजी हो, में कार्यशील और लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय उपलब्ध कराए जाएं तथा उनमें उपयोग योग्य जल की सुविधा हो।

भाषा गोला नरेश

नरेश