नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी महेश दीक्षित ने मंगलवार को खुफिया ब्यूरो (आईबी) के नये निदेशक का कार्यभार संभाल लिया।
उन्होंने तपन कुमार डेका की जगह ली, जो चार साल के कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं।
आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी दीक्षित (जो वर्तमान में तेलंगाना में सेवा दे रहे थे) दो साल के कार्यकाल के लिए प्रमुख आंतरिक खुफिया एजेंसी के प्रमुख होंगे।
उनकी नियुक्ति को पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने मंजूरी दी थी।
पदोन्नति से पहले, दीक्षित आईबी में विशेष निदेशक थे और आतंकवाद रोधी ‘डेस्क’ के प्रभारी होने के साथ-साथ रणनीतिक महत्व वाले दूसरे विभागों की देखरेख भी कर रहे थे।
चिकित्सक से कानून प्रवर्तन अधिकारी बने दीक्षित, इस अहम पद पर लगभग तीन दशकों के व्यापक अनुभव के साथ आए हैं। सुरक्षा तंत्र में, उन्हें जमीनी स्तर पर मजबूत खुफिया नेटवर्क और आतंकवाद-रोधी मामलों में गहरी समझ के लिए जाना जाता है।
अपने करियर के दौरान, दीक्षित ने पूर्वोत्तर और लद्दाख में अभियान चलाने से लेकर नक्सल-रोधी ‘डेस्क’ संभालने तक, कई तरह की और संवेदनशील जिम्मेदारियां निभाई हैं।
तेलंगाना में काम करते हुए, राज्य की आईबी और पुलिस के साथ मिलकर किये गए उनके प्रयासों ने देश की सबसे बेहतरीन आतंकवाद-रोधी इकाइयों में से एक को बनाने में अहम भूमिका निभाई। यह उस वक्त हुआ जब हैदराबाद, इंडियन मुजाहिदीन और हूजी जैसे इस्लामी आतंकवादी संगठनों का मुख्य केंद्र बन गया था।
उन्होंने मॉस्को में भारतीय मिशन में भी सेवा दी।
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद, जम्मू कश्मीर में आंतरिक स्थिरता बनाए रखने में दीक्षित ने श्रीनगर में ‘सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो’ (एसआईबी) के प्रमुख के तौर पर अहम भूमिका निभाई।
पिछले साल, श्रीनगर पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के आधार पर, उन्होंने कश्मीर घाटी में एक बड़े सफेदपोश आतंकी नेटवर्क का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उनकी सेवाओं के सम्मान में उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा गया है, जिनमें ‘विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक’, ‘सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक’ और ‘पुलिस आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक’ शामिल हैं।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश