नयी दिल्ली, नौ मई (भाषा) दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) ने रैन बसेरों के पास स्थित सरकारी अस्पतालों की पहचान कर ली है और राजधानी के आश्रयों में ‘रैन बसेरा ऐप’ के क्यूआर कोड लगाए हैं, ताकि प्रतिकूल मौसम के दौरान वहां रहने वाले लोग आपातकालीन सहायता प्राप्त कर सकें। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आश्रय स्थलों पर आस-पास के अस्पतालों की जानकारी, आपातकालीन प्रतिक्रिया नंबर और डीयूएसआईबी के ग्रीष्मकालीन नियंत्रण कक्ष के संपर्क विवरण प्रदर्शित करने वाले बैनर लगाए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में भीषण गर्मी की आशंका के मद्देनजर आश्रय गृहों में रहने वाली बेघर लोगों की सुरक्षा के लिए डीयूएसआईबी ने उपायों पर अमल तेज कर दिया है।
अधिकारियों ने बताया कि सभी आश्रय गृह में वहां रहने वाले लोगों के लिए दिन में तीन बार भोजन, स्वच्छता, पीने का पानी और बिस्तर सहित बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि आश्रय स्थलों में पानी के डिस्पेंसर या कूलर,पंखे और मच्छर भगाने वाले उपकरण उपलब्ध लगाए गए हैं।
अपनी ग्रीष्मकालीन कार्य योजना के हिस्से के रूप में, डीयूएसआईबी आश्रय गृहों में ओआरएस पैकेट वितरित कर रहा है, जबकि निवासियों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए मुफ्त ओआरएस की उपलब्धता के संबंध में पोस्टर लगाए गए हैं।
डीएसआईबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘निवासियों के लिए पर्याप्त जलपान सुनिश्चित किया जा रहा है। इन आश्रय गृहों में लगे विद्युत उपकरणों की छोटी-मोटी मरम्मत का काम भी चल रहा है और यह अगले सप्ताह तक पूरा हो जाएगा।’’
डीयूएसआईबी राष्ट्रीय राजधानी में कुल 197 आश्रय स्थलों का संचालन कर रहा है, जिनकी कुल क्षमता लगभग 17,286 लोगों की है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 82 आश्रय स्थल स्थायी कंक्रीट (आरसीसी) संरचनाओं से संचालित होते हैं, जबकि 115 पोर्टेबल केबिनों से संचालित होते हैं।
इन आश्रय स्थलों में औसतन प्रतिवर्ष लगभग 5,500 लोग रहते हैं। रात्रि आश्रय स्थलों का लाभ उठाने वाले अधिकांश लोग प्रवासी और बेघर होते हैं।
भाषा
धीरज दिलीप
दिलीप