नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को स्पाइसजेट से कहा कि वह मीडिया कारोबारी कलानिधि मारन एवं केएएल एयरवेज के साथ जारी कानूनी विवाद के सिलसिले में 144 करोड़ रुपये जमा करने के लिए समय बढ़ाने की अर्जी लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाए।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने स्पाइसजेट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी द्वारा दी गई इस दलील पर गौर किया कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने एयरलाइन के संचालन और वित्तीय स्थिति पर असर डाला है।
हाल में सरकार द्वारा विमानन कंपनियों के लिए शुरू किए गए 5,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का हवाला देते हुए रोहतगी ने राशि जमा करने के लिए तीन महीने का समय देने का अनुरोध किया था।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने समय देने से इनकार कर दिया और स्पाइसजेट को उच्च न्यायालय में अपील करने को कहा।
पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘पश्चिम एशिया संकट से पहले क्या हुआ था? पांच मई को जो कुछ हुआ (वित्तीय सहायता की घोषणा) उसे समय सीमा बढ़ाने का आधार नहीं बनाया जा सकता।’’
सुनवाई के दौरान रोहतगी ने कहा, ‘‘निजी हित को जनहित के आगे झुकना होगा। मेरे पास हजारों कर्मचारी हैं।’’
केएएल एयरवेज की ओर से पेश वकील ने समय सीमा बढ़ाने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अपील की आड़ में समीक्षा की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उच्च न्यायालय ने चार मई को स्पाइसजेट और उसके प्रवर्तक अजय सिंह की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें कलानिधि मारन एवं केएएल एयरवेज के साथ कानूनी विवाद के संबंध में स्पाइसजेट को 144 करोड़ रुपये से अधिक जमा करने के लिए पूर्व के आदेश की समीक्षा का अनुरोध किया गया था।
अदालत ने स्पाइसजेट और सिंह पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और उन्हें निर्देश दिया कि वे रजिस्ट्री में 144 करोड़ 51 लाख 69 हजार 887 रुपये जमा करने के लिए तत्काल कदम उठाएं।
अदालत ने 19 जनवरी को स्पाइसजेट और सिंह को मारन के साथ उनके विवाद में दिए गए एक मध्यस्थता निर्णय के तहत 194 करोड़ रुपये की देनदारी के मुकाबले 144 करोड़ रुपये छह सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया था। इसे जमा करने की समय-सीमा 18 मार्च को चार सप्ताह के लिए बढ़ा दी गई थी।
सिंह और उनकी बजट एयरलाइन ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वित्तीय संकट सहित कई आधारों पर 18 मार्च के निर्देश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था।
स्पाइसजेट ने इसके बदले गुरुग्राम में एक व्यावसायिक संपत्ति को गिरवी के रूप में पेश किया और अदालत को सूचित किया कि केंद्र सरकार उसे कुछ सहायता देने को तैयार है।
भाषा सुरभि सुरेश
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