फर्जी बीमा दावों की जांच के लिए सभी राज्यों में एसआईटी गठित की जाए : उच्चतम न्यायालय

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फर्जी बीमा दावों की जांच के लिए सभी राज्यों में एसआईटी गठित की जाए : उच्चतम न्यायालय

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 07:36 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 07:36 PM IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने संदिग्ध फर्जी बीमा दावों की जांच के लिए सभी राज्यों को विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया है।

शीर्ष अदालत ने मंगलवार को कहा कि फर्जी बीमा दावे दाखिल किए जा रहे हैं और उन्हें मंजूर भी किया जा रहा है तथा इसमें एक निश्चित चलन नजर आ रहा है, जिसमें एक ही वाहन को कई दुर्घटनाओं में शामिल दिखाया जाता है।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जो शुरुआत में कथित दुर्घटना में शामिल वाहन की पहचान से संबंधित था। सुनवाई के दौरान बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के संकेत मिलने के बाद पीठ ने कार्यवाही का दायरा बढ़ाकर देशभर में फर्जी बीमा दावों की जांच तक कर दिया।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अदालत यह उचित समझती है कि यह बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी होगी कि धोखाधड़ी का संकेत देने वाले सभी दावों को एसआईटी के पास भेजा जाए और इसमें चुनिंदा मामलों को भेजने का तरीका न अपनाया जाए।’’

पीठ ने कहा कि यदि यह पाया गया कि संबंधित बीमा कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने मामलों को चुनिंदा तरीके से राज्य की एसआईटी को भेजा है, तो उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे फर्जी दावों से न केवल बीमा कंपनियों पर वित्तीय दबाव पड़ता है, बल्कि अंततः वास्तविक उपभोक्ताओं को भी अधिक प्रीमियम का भुगतान करना पड़ सकता है।

सभी राज्यों को समर्पित एसआईटी गठित करने का निर्देश देते हुए पीठ ने कहा कि बीमा कंपनियों से संदिग्ध फर्जी दावों के संबंध में प्राप्त सभी शिकायतें त्वरित जांच के लिए संबंधित राज्य की एसआईटी को भेजी जाएं।

पीठ ने राज्यों को इन जांच दलों के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मी उपलब्ध कराने और ऐसे मामलों की जांच के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का खुलासा करने का भी निर्देश दिया।

पीठ ने बीमा कंपनियों को यह भी निर्देश दिया कि जहां एसआईटी की सिफारिश या प्राथमिकी से यह संकेत मिले कि उनके अधिकारी फर्जी दावों को सुगम बनाने में शामिल थे, वहां उनके खिलाफ बिना देरी विभागीय कार्रवाई की जाए।

आदेश में बीमा कंपनियों को हलफनामे दाखिल कर एसआईटी को भेजे गए मामलों तथा उन अधिकारियों के खिलाफ की गई आंतरिक कार्रवाई का ब्योरा देने को कहा गया है, जिन पर कंपनी के हितों के खिलाफ काम करने या धोखाधड़ी को बढ़ावा देने का संदेह है।

पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने उच्चतम न्यायालय के पहले के आदेश के बाद एक विशेष एसआईटी का गठन पहले ही कर लिया है।

उत्तर प्रदेश ने पीठ को बताया कि उसे 2,188 शिकायतें मिली हैं, जिनमें से 1,029 से अधिक की जांच की जा चुकी है और 533 आरोपियों के खिलाफ 231 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

पीठ ने कार्यवाही का दायरा बढ़ाते हुए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई), वित्त मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल को भी मामले में पक्षकार बनाया।

सुनवाई के दौरान एक साझा पोर्टल विकसित करने का सुझाव दिया गया, जिसमें बीमा दावों से संबंधित आंकड़े उपलब्ध हों और बीमा कंपनियां यह पता लगा सकें कि कोई वाहन, व्यक्ति या अन्य इकाई बार-बार दावों में शामिल तो नहीं रही है।

पीठ को यह भी बताया गया कि मौजूदा डेटाबेस, जैसे वाहन, सारथी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के ई-डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (ईडीएआर) पोर्टल को एकीकृत कर दुर्घटनाओं और वाहनों से संबंधित विवरणों के सत्यापन में सुधार किया जा सकता है।

पीठ ने एक अन्य सुझाव को स्वीकार किया कि जब मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) धोखाधड़ी या मिलीभगत के आधार पर किसी बीमा दावे को खारिज करता है, तो बीमा कंपनी को तत्काल संबंधित राज्य की एसआईटी को इसकी जानकारी देनी चाहिए और अपने अधिकारियों की संभावित संलिप्तता की आंतरिक जांच करनी चाहिए।

पीठ ने इस सुझाव को निर्देश में बदलते हुए बीमा कंपनियों को अपने हलफनामों में इसका विवरण देने का आदेश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। पीठ ने सभी पक्षों को अपने हलफनामों का एक-एक पृष्ठ का सारांश तैयार रखने का निर्देश दिया है।

भाषा रवि कांत रवि कांत माधव

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