कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर कटौती का मतलब उनकी बिक्री की मंजूरी नहीं: सतीशन

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कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर कटौती का मतलब उनकी बिक्री की मंजूरी नहीं: सतीशन

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  • Publish Date - July 1, 2026 / 07:51 PM IST,
    Updated On - July 1, 2026 / 07:51 PM IST

तिरुवनंतपुरम, एक जुलाई (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर घटाने के संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के फैसले का बुधवार को बचाव किया, लेकिन स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव न तो स्वत: लागू होगा और न ही इससे राज्य में ऐसे पेय पदार्थों की बिक्री का रास्ता खुलेगा।

बाद में विधानसभा ने राज्य के बजट में घोषित कर प्रस्तावों को विधायी मंजूरी देते हुए वित्त विधेयक पारित कर दिया। इससे पहले विपक्ष ने सरकार पर इस विधेयक के जरिए कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों की बिक्री का रास्ता साफ करने का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कर संबंधी इस प्रस्ताव को केरल में ऐसे पेय पदार्थों की बिक्री की अनुमति देने के निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों की बिक्री की अनुमति दी जाएगी या नहीं, इस पर व्यापक जनपरामर्श के बाद आबकारी नीति के तहत अलग से निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अंततः इन्हें शुरू नहीं करने का फैसला करती है, तो राज्य में इनकी बिक्री नहीं होगी।

कर दर अधिसूचित होते ही इनकी बिक्री स्वत: शुरू हो जाने के विपक्ष के दावे को खारिज करते हुए सतीशन ने कहा कि यदि सरकार इन्हें बाजार में नहीं लाने का निर्णय करती है तो राज्य में शराब की थोक बिक्री पर एकाधिकार रखने वाला केरल स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन ऐसे उत्पादों की खरीद ही नहीं करेगा।

उन्होंने विपक्ष पर बजट से ध्यान भटकाने के लिए ‘‘एक सामान्य मुद्दे का अनावश्यक रूप से राजनीतिकरण’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि बजट में शामिल कर प्रस्तावों पर पहले से जनपरामर्श नहीं कराया जा सकता।

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर घटाने का प्रस्ताव पहले से ही बजट का हिस्सा था, इसे वित्त विधेयक के जरिए नया प्रावधान जोड़कर शामिल नहीं किया गया।

सदन ने सरकार द्वारा पेश आधिकारिक संशोधनों को ध्वनिमत से मंजूरी देने के बाद विधेयक पारित कर दिया।

विपक्ष के इस आरोप का खंडन करते हुए कि यह प्रावधान वित्त विधेयक में ‘‘चुपके से’’ जोड़ा गया है, सतीशन ने कहा कि कर ढांचे में बदलाव का उल्लेख उन्होंने अपने बजट भाषण में स्पष्ट रूप से किया था और बजट के कर प्रस्तावों को वित्त विधेयक में शामिल करना सामान्य विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोई नयी पहल नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इससे संबंधित फाइल 16 नवंबर, 2021 को पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी।

उन्होंने कहा कि ए. पी. उदयभानु आयोग और न्यायमूर्ति रामचंद्रन समिति ने उच्च अल्कोहल मात्रा वाली शराब पर निर्भरता कम करने और नशामुक्ति को बढ़ावा देने के लिए कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की थी।

उनके अनुसार, तत्कालीन आबकारी मंत्री एम. वी. गोविंदन ने मसौदा संशोधन को मंजूरी दी थी, जिसे बाद में पड़ताल के लिए विषय समिति के पास भेजा गया।

सतीशन ने कहा कि सरकार केवल 20 प्रतिशत तक अल्कोहल वाले पेय पदार्थों के लिए अलग श्रेणी बना रही है। उन्होंने कहा कि इसके मुकाबले राज्य में वर्तमान में बिकने वाली भारत में निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) में 42.86 प्रतिशत अल्कोहल होता है।

उन्होंने कहा कि कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर दक्षिण भारत के राज्यों में केरल सबसे अधिक कर लगाता है। उन्होंने उच्च अल्कोहल मात्रा वाली शराब की तुलना में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों को प्राथमिकता देने संबंधी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिशों का भी हवाला दिया।

मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में कर्नाटक में ऐसे उत्पादों पर लागू कर ढांचे का भी उल्लेख किया।

उन्होंने घोषणा की कि समयबद्ध कार्ययोजना के तहत विभिन्न विभागों की 541 परियोजनाएं अगले 100 दिनों के भीतर पूरी की जाएंगी।

इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

मुख्यमंत्री का यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर प्रस्तावित कर कटौती का विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ यूडीएफ के भीतर भी विरोध हो रहा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. एम. सुधीरन ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है, जबकि यूडीएफ के प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी इस पर चिंता जताई है। इसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम फैसला व्यापक विचार-विमर्श के बाद यूडीएफ सरकार की आबकारी नीति के तहत ही लिया जाएगा।

भाषा अमित अविनाश

अविनाश

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