नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने एक नाबालिग की अभिरक्षा को लेकर तेलंगाना उच्च न्यायालय का आदेश रद्द करते हुए हैदराबाद की बाल कल्याण समिति को निर्देश दिया कि वह बच्चे को उसके दत्तक माता-पिता होने का दावा करने वाले दंपति को सौंप दे।
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मोहम्मद अकबर और अन्य द्वारा तेलंगाना उच्च न्यायालय के 12 जून 2025 के आदेश के खिलाफ दायर अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।
पीठ ने बृहस्पतिवार को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, हम रिट याचिका में तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा पारित 12 जून 2025 के विवादित आदेश को रद्द करते हैं… परिणामस्वरूप, संबंधित प्रतिवादी संख्या-दो यानी ‘बाल कल्याण समिति, शिशु गृह, हैदराबाद’ को निर्देश दिया जाता है कि वह बच्चे की अभिरक्षा अपीलकर्ता संख्या-एक और दो (मोहम्मद अकबर और उनकी पत्नी) को सौंप दे।
इस मामले में तेलंगाना सरकार का प्रतिनिधित्व वकील श्रवण कुमार ने किया।
यह मामला उस वक्त शुरू हुआ था जब बच्चे को इस संदेह में बाल कल्याण समिति की अभिरक्षा में ले लिया गया था कि उसकी जैविक मां ने उसे अपीलकर्ता संख्या-ए और दो को बेच दिया था।
शीर्ष अदालत ने इस बात का संज्ञान लिया कि यह तथ्य निर्विवाद था कि तीसरी अपीलकर्ता ही बच्चे की जैविक मां थी।’’
अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ इस तथ्य से कि जैविक मां ने वित्तीय तंगहाली के कारण बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ होने पर उसे गोद दे दिया था, स्वयमेव यह धारणा नहीं बनाई जा सकती कि बच्चे को बेच दिया गया था।
पीठ ने कहा कि बच्चे की देखभाल प्रथम और द्वितीय अपीलकर्ता द्वारा की जा रही थी, जिन्हें आदेश में उसके दत्तक माता-पिता के रूप में वर्णित किया गया है, और यह ऐसा मामला नहीं था, जहां उनके द्वारा बच्चे की ठीक से देखभाल नहीं की गई हो।
इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बाल कल्याण समिति के पास बच्चे की अभिरक्षा को अवैध अभिरक्षा मानने से इनकार कर दिया था।
अदालत ने यह भी पाया कि गोद लेने का दस्तावेज ‘‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015’’ के नियमों के मुताबिक नहीं था और गोद लेने की प्रक्रिया ‘केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (कारा) के जरिये नहीं हुई थी।
बच्चे की अभिरक्षा दत्तक माता-पिता को सौंपने का आदेश देते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश का दूसरे बच्चों की तस्करी के आरोपों से जुड़ी जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भाषा सुरेश अविनाश
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