नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर 18 अगस्त को सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रदेश के अन्य अधिकारियों ने आठ जनवरी को कोलकाता में राजनीतिक परामर्श कंपनी आईपैक के कार्यालय पर छापेमारी की कार्रवाई के दौरान बाधा उत्पन्न की थी।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने कहा कि वे ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद इस मामले की सुनवाई करेंगे।
पीठ ने कहा, ‘‘हम आंशिक कार्य दिवसों के बाद इस पर सुनवाई करेंगे।’’
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए हाल में 293 सीट पर कराए गए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 207 सीट जीतकर पहली बार अपने दम पर राज्य में सरकार बनाई है।
ईडी ने पश्चिम बंगाल में कानून और व्यवस्था के पूरी तरह से ध्वस्त होने का आरोप लगाते हुए 23 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय में दावा किया था कि ममता बनर्जी ने आईपैक के खिलाफ धनशोधन मामले की जांच में बाधा डालने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया।
ईडी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी के साथ व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करके तलाशी अभियान को रोका और संघीय एजेंसी के अधिकारियों द्वारा एकत्र किए गए सबूतों को छीन लिया।
शीर्ष अदालत ने 22 अप्रैल को इस मामले में दलीलें सुनने के दौरान टिप्पणी की कि यदि कोई मुख्यमंत्री किसी जांच में हस्तक्षेप करता है तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है।
ईडी ने कथित बाधा डालने और ‘जवाबी’ प्राथमिकियों के मामले में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्देश देने का अनुरोध करते हुए दलील दी कि बनर्जी और राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के आचरण की जांच के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी की आवश्यकता है।
पश्चिम बंगाल सरकार और अन्य प्रतिवादियों ने ईडी की याचिका की विचारणीयता पर सवाल उठाया था।
भाषा धीरज वैभव
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