नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) के आयोजन में अनियमितताएं सामने आने के बाद सरकार को ‘‘कड़े फैसले’’ लेने पड़े और प्राधिकारी यह नहीं चाहते कि ‘‘परीक्षा माफिया’’ के कारण किसी भी योग्य अभ्यर्थी को उसके हक की सीट से वंचित होना पड़े।
प्रधान ने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि 21 जून को पुन: होने वाली परीक्षा ‘‘शत प्रतिशत त्रुटिरहित’’ रहे।
उन्होंने ‘जागरण भारत एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा प्रवेश परीक्षा से जुड़े विवाद के कारण करीब 22 लाख विद्यार्थियों को ‘‘मानसिक पीड़ा’’ सहनी पड़ी और सरकार व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ‘‘22 लाख बच्चों को भारी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी। उस पीड़ा को समझते हुए और जिम्मेदारी लेते हुए मैं आज कह रहा हूं कि हमें कुछ कड़े फैसले लेने पड़े।’’
चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए तीन मई को हुई राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने हाल में रद्द कर दिया था। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है और दोबारा परीक्षा 21 जून को होनी है।
प्रधान ने कहा कि सरकार ने यह पता लगने के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला किया कि ‘‘कुछ मूल्यांकनों में गड़बड़ी हुई थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम नहीं चाहते थे कि शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं में शामिल लोगों और परीक्षा माफिया की साजिश के कारण एक भी विद्यार्थी अपनी हक की सीट से वंचित हो।’’
मंत्री ने इस मुद्दे से निपटने के तरीके को लेकर हुई आलोचना को स्वीकार किया लेकिन साथ ही कहा कि सरकार इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम आलोचना एवं चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और मैं इसे स्वीकार करता हूं लेकिन व्यवस्था को दुरुस्त करना हमारी जिम्मेदारी है। आंखें मूंदकर समस्या से मुंह मोड़ लेना हमारा कर्तव्य नहीं है।’’
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार 21 जून को दोबारा होने वाली परीक्षा को सुचारू रूप से कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि 21 जून को होने वाली परीक्षा 100 प्रतिशत त्रुटिरहित रहे।’’
भाषा सिम्मी संतोष
संतोष