संभवत: पटरी के खिसकने से शहडोल-नागपुर एक्सप्रेस बेपटरी हुई थी : अधिकारी

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संभवत: पटरी के खिसकने से शहडोल-नागपुर एक्सप्रेस बेपटरी हुई थी : अधिकारी

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 09:40 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 09:40 PM IST

(जीवन प्रकाश शर्मा)

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में 13 मार्च को 18 डिब्बों वाली शहडोल-नागपुर एक्सप्रेस का आखिरी डिब्बा संभवत: पटरी के खिसकने की वजह से बेपटरी हुआ था। शुरुआती जांच में यह आकलन किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक लोको पायलट द्वारा समय पर ब्रेक नहीं लगाने पर यह घटना एक बड़े हादसे का रूप ले सकता था। इसके मुताबिक घटना 13 मार्च को दोपहर के करीब तब हुयी जब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के नैनपुर-छिंदवाड़ा-नागपुर खंड पर खैररांजी-गंगाटोला के पास रेलगाड़ी का आखिरी डिब्बे के पहिए पटरी से उतर गए।

इस घटना में कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन इसके कारण इस मार्ग पर ट्रेनों के संचालन में देरी हुई।

चार अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए एक संयुक्त नोट में कहा गया, ‘‘चालक दल के बयानों, घटनास्थल पर किए गए निरीक्षणों और ‘ट्रैक रीडिंग’ का अध्ययन करने के बाद, पटरी से उतरने का प्रथम दृष्टया कारण पटरी का खिसकना प्रतीत होता है।’’

एक अधिकारी के मुताबिक लोको पायलट ने अपने बयान में कहा कि इंजन सामान्य परिस्थितियों में पटरी से उतरने वाले स्थान को पार कर गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दोपहर 12.01 बजे ट्रेन नैनपुर से रवाना हुई थी और खैररांजी को पार कर रही थी, तभी आखिरी डिब्बे में बैठे ट्रेन मैनेजर को एक जोरदार झटका लगा, वह अपनी कुर्सी से गिर गया और उसने ट्रेन के पीछे धूल का एक बड़ा गुब्बार देखा।

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन मैनेजर ने आपातकालीन ब्रेक लगाया और वॉकी-टॉकी के ज़रिए लोको पायलट को ट्रेन रोकने का निर्देश दिया। ट्रेन के रुकने से पहले आखिरी डिब्बा 905 मीटर तक घिसटता रहा।

विशेषज्ञों ने कहा कि जब उच्च पार्श्व भार, ऊष्मीय बल या गिट्टी से कमजोर प्रतिरोध जैसे कारकों के कारण रेल और स्लीपर अपनी मूल स्थिति से बगल में खिसक जाते हैं।

एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘‘पटरियों के खिसकाव की नियमित निगरानी करना पटरी रखरखाव विभाग का काम है, क्योंकि इससे गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं।’’

भाषा धीरज रंजन

रंजन