नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चंडीगढ़ में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के खातों से 504 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी और बैंकों के दो पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सीबीआई ने एक बयान में बताया कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के सदस्य सचिव पद पर तैनात रहे आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार के कथित कृत्यों के कारण सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ और सरकार को लगभग 169 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
सीबीआई ने बताया, “जांच में यह सामने आया कि सदस्य सचिव के रूप में प्रदीप कुमार के कृत्यों का इस धोखाधड़ी से सीधा संबंध है। निवेश से जुड़े पूरे कामकाज को उन्होंने स्वयं अपने स्तर पर संभाला था। सावधि जमा (एफडी) के लिए निर्धारित सीमा से कहीं अधिक धनराशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को भेजी गई थी।”
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने बयान में बताया, “सावधि जमा के लिए बोर्ड की धनराशि को पहले चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-32 की आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में खोले गए एक खाते में अंतरित किया गया था।”
अधिकारी ने बताया कि हैरानी की बात यह है कि इस खाते को खोलने के संबंध में विभाग कोई भी ऐसा रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे इसके खोले जाने की पुष्टि हो सके।
बयान में बताया गया, “साजिश इतनी गहरी थी कि बिना किसी मंजूरी के ही यह खाता खोल दिया गया और सावधि जमा (एफडी) के नाम पर इसमें धनराशि अंतरित कर दी गई। अब तक की जांच में यह सामने आया है कि इस बैंक में कोई भी सावधि जमा वास्तव में की ही नहीं गई थी।”
एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस खाते से फर्जी लेन-देन किए गए, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ और राज्य सरकार को लगभग 169 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
बयान में बताया गया, “504 करोड़ रुपये के इस पूरे घोटाले में हरियाणा सरकार के प्रभावित विभागों में से किसी एक विभाग को हुआ यह सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान है।”
प्रवक्ता ने बताया कि बार-बार प्रयास किए जाने के बावजूद कुमार जांच में शामिल नहीं हो रहे थे।
बयान में बताया गया, “सीबीआई ने कुमार के ठिकाने का पता लगाया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।”
इससे पहले एजेंसी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख शमीम डार और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक चरणजीत सिंह रंधावा को गिरफ्तार किया था।
अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने अतिरिक्त धनराशि का अनियमित रूप से सावधि जमा (एफडी) में निवेश कर और इस उद्देश्य से खोले गए बैंक खातों के माध्यम से फर्जी लेन-देन कर इस राशि का गबन किया।
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया, “जांच में पता चला कि दोनों आरोपियों ने बैंक अधिकारियों के रूप में अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए खाते खुलवाने और फर्जी लेन-देन को सुगम बनाने में आपराधिक भूमिका निभाई, जिसके जरिए जनता के धन को दूसरी जगह अंतरित किया गया।”
सीबीआई ने चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-32 की आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में खुले सरकारी खातों में कथित गबन से जुड़े मामले की जांच अपने हाथ में ली थी।
प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों के 504 करोड़ रुपये की धनराशि कथित तौर पर फर्जी सावधि जमा (एफडी) तथा ‘डेबिट नोट’ के जरिए गबन कर ली गई।
प्रवक्ता ने बताया, “अब तक इस मामले में सीबीआई 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन लोक सेवक, दो कंपनियां और छह अन्य व्यक्ति शामिल हैं।”
भाषा जितेंद्र अविनाश
अविनाश