नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर के तबादले को शनिवार को न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया और कहा कि उच्चतम न्यायालय तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह आरोप भी लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए ‘‘न्यायिक प्रणाली का अपहरण कर लिया है।’’
सीजेएम विभांशु सुधीर ने संभल हिंसा मामले में नौ जनवरी को तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी सहित 15-20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके कुछ दिन बाद ही उनका तबादला कर दिया गया था।
खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘भाजपा सरकार ने एक बार फिर इस देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को खुलेआम कमजोर करके अपना सबसे घातक, जन-विरोधी, संविधान-विरोधी, सत्तावादी और क्रूर तानाशाही चरित्र उजागर कर दिया है। संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का अचानक तबादला कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, यह न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘भाजपा ने एक खतरनाक और निंदनीय राजनीतिक फॉर्मूला ईजाद किया है कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करो, हिंसा फैलाओ, अपराधियों को बचाओ और फिर किसी भी संस्था को कुचल दो जो जवाबदेही की मांग करने की हिम्मत करे।’’
खेड़ा ने कहा कि संभल कोई अपवाद नहीं है, बल्कि यह जानबूझकर और गहरी खतरनाक रणनीति के तहत किया गया है।
उन्होंने दावा किया, ‘‘संभल में सांप्रदायिक हिंसा अचानक नहीं हुई थी। यह भाजपा सरकार की नफरत, ध्रुवीकरण और दंडमुक्ति की राजनीति का सीधा नतीजा था। कानून से बंधी संवैधानिक सरकार की तरह काम करने के बजाय, भाजपा ने सक्रिय रूप से सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दिया, नफरत फैलाने वालों को बचाया, और भेदभावपूर्ण, असंवेदनशील और हिंसक दमन के साथ जवाब दिया, जिससे हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच दरारें और गहरी हो गईं।’’
खेड़ा ने कहा कि तथाकथित ‘‘डबल-इंजन’’ भाजपा सरकार और भी आगे बढ़ गई है, जिसने न्यायपालिका को डराने, पालतू बनाने और आखिरकार उस पर कब्जा करने की कोशिश की है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘विभांशु सुधीर का तबादला इस बात का एक सटीक उदाहरण है कि कैसे सत्ताधारी पार्टी ने अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए न्यायिक प्रणाली का अपहरण कर लिया है।’’
खेड़ा ने कहा, ‘‘हम उच्चतम न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय से आग्रह करते हैं कि वे संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर के मनमाने और बेहद परेशान करने वाले तबादले का स्वतः संज्ञान लें। यह मुद्दा सिर्फ़ एक न्यायिक अधिकारी के तबादले से कहीं ज़्यादा है।’’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानून के शासन को बनाए रखने, संस्थागत स्वायत्तता की रक्षा करने तथा देश में लोकतांत्रिक शासन के और क्षरण को रोकने के लिए समय पर न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है।
भाषा हक नेत्रपाल
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