व्यवधान पैदा करने पर तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष विधानसभा से निकाले गये, निलंबित

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व्यवधान पैदा करने पर तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष विधानसभा से निकाले गये, निलंबित

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  • Publish Date - July 22, 2026 / 07:21 PM IST,
    Updated On - July 22, 2026 / 07:21 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

कोलकाता, 22 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को विपक्ष के मुख्य सचेतक अखरुज्जमां को बोलने से रोकने पर ममता बनर्जी नीत ‘कालीघाट’ गुट से जुड़े तृणमूल विधायक कुणाल घोष को मार्शल की मदद से सदन से बाहर निकाल दिया गया तथा बाद में दिन की बाकी कार्यवाही के लिए उन्हें निलंबित दिया गया।

गृह और पहाड़ी मामलों के विभाग की बजटीय मांगों पर चर्चा के दौरान नाटकीय दृश्य देखने को मिला। बार-बार शांति बनाए रखने की अपील के बावजूद हंगामा जारी रहने पर अध्यक्ष रतींद्र बोस के निर्देश पर विधानसभा मार्शल घोष को सदन से बाहर ले गये। घोष ने सदन से निकाले जाने का विरोध किया।

नारेबाज़ी, धक्का-मुक्की और मार्शल के दखल वाले इन नाटकीय दृश्यों ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक दल के भीतर दरार को उजागर कर दिया। यह दरार पार्टी के कालीघाट खेमे और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के बीच है।

हंगामा तब शुरू हुआ जब ऋतब्रत गुट के विधायक अखरुज़्जमां चर्चा में हिस्सा लेने के लिए खड़े हुए। घोष तुरंत अपनी सीट से उठे और अखरुज़्जमां के लिए तय माइक्रोफ़ोन के सामने जाकर खड़े हो गए। उन्होंने बार-बार पूछा कि वक्ताओं की सूची से उनका नाम क्यों हटाया गया।

घोष को अखरुज़्जमां से यह पूछते हुए सुना गया, ‘‘आपने मेरा नाम क्यों हटाया? आप मुझे बोलने क्यों नहीं दे रहे हैं?’’

इस पर दोनों पक्षों के सदस्यों ने ज़ोरदार विरोध किया।

उस समय ऋतब्रत बनर्जी अखरुज़्जमां के बगल में बैठे थे, जबकि वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम और जावेद खान पास बैठे थे।

कुछ ही देर में, कई सदस्य आसन के समीप आ गए, जिससे कार्यवाही रुक गई। कई भाजपा विधायक भी आसन की ओर बढ़े, लेकिन पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने उन्हें अपनी सीटों पर वापस जाने के लिए मनाया।

शोर-शराबे के बीच अध्यक्ष रतींद्र बोस ने घोष से बार-बार अपनी सीट पर जाने की अपील की और यह चेतावनी भी दी कि यदि उन्होंने निर्देश नहीं माना तो वह उन्हें सदन से निकालने के लिए बाध्य हो जायेंगे।

घोष के न मानने पर, अध्यक्ष ने विधानसभा के मार्शल को उन्हें सदन से बाहर निकालने का निर्देश दिया। घोष ने इस कार्रवाई का विरोध किया, जिससे मार्शल के साथ धक्का-मुक्की हुई। इस हंगामे के बीच वह लड़खड़ा गए और फिर ज़ोरदार विरोध के बीच उन्हें विधानसभा से बाहर ले जाया गया।

उद्योग मंत्री तापस रॉय ने शुरू में घोष के ‘अनियंत्रित व्यवहार’ का हवाला देते हुए मांग की कि उन्हें विधानसभा सत्र के बाकी समय के लिए निलंबित कर दिया जाए।

इसके बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उन्हें पूरे सत्र के लिए निलंबित करके ‘नायक बनाने’ की कोई ज़रूरत नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि एक दिन के लिए निलंबन ही काफी होगा।

इसके बाद अध्यक्ष ने सदन के सामने प्रस्ताव रखा, जिसे भाजपा विधायकों और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल गुट के सदस्यों ने समर्थन किया। इसक बाद घोष को दिनभर के लिए निलंबित कर दिया गया।

घोष ने आरोप लगाया कि विरोधी गुट की ओर से ममता बनर्जी गुट के विधायकों को विधानसभा में बोलने के मौके जान-बूझकर नहीं दिए जा रहे थे।

ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि बेलेघाटा के विधायक को सदन से ज़बरदस्ती बाहर निकालने और उसके बाद उन्हें निलंबित करने से विधानसभा की “गरिमा और अखंडता” पर सवाल उठे हैं।

यह घटना ऐसे समय हुई जब विपक्ष के वक्ताओं की सूची को लेकर हुई उलझन विधानसभा तक पहुंच गई। इससे तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के भीतर मतभेद सामने आ गए कि बहस में भाग लेने वाले सदस्यों के नामों का फैसला करने का अधिकार किसे है।

मंगलवार को कालीघाट गुट से जुड़े विधायकों ने शिकायत की कि उनके सुझाए गए नामों को वक्ताओं की सूची से हटाया जा रहा है। इससे पता चलता है कि तृणमूल में विभाजन के बाद विधायक दल के कामकाज पर नियंत्रण को लेकर खींचतान जारी है।

भाषा राजकुमार अविनाश

अविनाश