कोटा, नौ मई (भाषा) राजस्थान के कोटा में सरकारी ‘न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल’ के स्त्री रोग वार्ड में दो और महिलाएं – शिरीन (20) तथा किरण (26) संक्रमण की चपेट में आ गई हैं और परिवार के सदस्यों का आरोप है कि स्थिति बिगड़ने के बाद मरीजों को एक निजी स्वास्थ्य केंद्र में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में ‘सिजेरियन ऑपरेशन’ के बाद गुर्दे में संक्रमण से पीड़ित चार महिलाओं में से तीन की हालत गंभीर बनी हुई है, जबकि चौथी महिला के ठीक होने के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, पांच महीने की गर्भवती शिरीन की 4 मई को अस्पताल के स्त्री रोग वार्ड में डॉक्टर नेहा द्वारा जांच की गई थी, जिन्होंने अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर गर्भाशय खुला होने का निदान किया और छिद्र को बंद करने के लिए टांके लगाने का सुझाव दिया।
शिरीन के चाचा मोहम्मद एजाज ने शनिवार को एक निजी अस्पताल के बाहर मीडियाकर्मियों को बताया कि शिरीन को पांच मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अगले दिन डॉ. नेहा द्वारा उसका ऑपरेशन किया गया। शिरीन का फिलहाल निजी अस्पताल में इलाज हो रहा है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद शुरुआत में उसकी हालत स्थिर थी। हालांकि, सात मई को उसे रक्तस्राव शुरू हो गया और रक्तचाप गिर गया।
शिरीन की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, इसलिए उसे गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में स्थानांतरित कर दिया गया और परिवार को बताया गया कि उसे संक्रमण हो गया है।
एजाज ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह ‘न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल’ के डॉक्टरों ने कथित तौर पर शिरीन को एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के लिए यह कहते हुए मजबूर किया कि एक अन्य महिला को भी इसी तरह की गंभीर स्थिति में एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था।
उन्होंने दावा किया कि जब तक वे दूसरों से सलाह ले पाते, अस्पताल के कर्मचारियों ने कथित तौर पर शिरीन को स्त्री रोग वार्ड से बाहर निकाल दिया और उन्हें परिवार के एक सदस्य के साथ एम्बुलेंस में बिठाकर तलवंडी के एक निजी अस्पताल भेज दिया।
एजाज ने कहा, “यह देखकर मुझे गहरा झटका लगा कि चिकित्सा कर्मचारियों ने इलाज करना बंद कर दिया और सचमुच हमारे मरीज को वार्ड से बाहर निकाल दिया।”
शिरीन की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। परिवार ने बताया कि शुक्रवार शाम उसका डायलिसिस किया गया और शनिवार सुबह उसे जीवनरक्षक प्रणाली पर रखा गया।
दूसरी महिला, किरण (26), का छह मई को ‘न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल’ में ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद उसे जटिलताएं हो गईं और उसकी हालत बिगड़ गई।
इसके बाद, शुक्रवार को कथित तौर पर उसे सरकारी अस्पताल से जबरन छुट्टी दे दी गई और उसी निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। हालांकि, इस मामले पर उसके परिवार से संपर्क नहीं हो सका।
इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि इस बीच, चार मई को अस्पताल में सी-सेक्शन कराने के बाद संक्रमण से पीड़ित तीन महिलाएं – धन्नू, सुशीला और रागनी – की हालत गंभीर बनी हुई है, जबकि चौथी महिला, चंद्रकला, खतरे से बाहर बताई जा रही है। उसमें स्वस्थ होने के लक्षण नजर आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि तीनों में से धन्नू की हालत सबसे गंभीर बताई जा रही है और उसके नवजात शिशु को भी ‘ऑक्सीजन सपोर्ट’ पर रखा गया है।
अधिकारी ने कहा कि अन्य चार नवजात शिशु स्वस्थ हैं और अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में निगरानी में हैं।
चार मई (सोमवार) की शाम न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लगभग 12-13 महिलाओं की ‘सीजेरियन डिलीवरी’ हुई, और ऑपरेशन के 8-12 घंटे बाद छह महिलाओं की हालत बिगड़ गई, जिनमें रक्तचाप और प्लेटलेट काउंट में गिरावट आदि शामिल थी।
उन्हें उसी रात गुर्दा रोग वार्ड में भर्ती कराया गया। हालांकि, मंगलवार सुबह इलाज के दौरान एक महिला, पायल (26), की मृत्यु हो गई, जबकि ज्योति (19) की मृत्यु बृहस्पतिवार को हुई।
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प्रशांत नेत्रपाल
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