जयपुर, 16 मार्च (भाषा) संसदीय कार्य मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में कहा कि वीरांगना मंजू जाट के संबंध में उनके बयान को लेकर कही जा रही बातें मिथ्या, भ्रामक एवं अफवाह हैं।
धारीवाल ने कहा कि उनके द्वारा वीरांगना मंजू जाट के संबंध में केवल इतना कहा गया था कि उसका देवर पहले से शादीशुदा है। उन्होंने यह भी कहा, ‘‘मैंने विधानसभा में अपने वक्तव्य में कहीं पर भी वीरांगना मंजू जाट के नाते जाने की बात नहीं कही। इसकी पुष्टि विधानसभा की कार्यवाही की वीडियोग्राफी से की जा सकती है।’’
गौरतलब है कि नाता प्रथा राजस्थान में प्रचलित पुरानी प्रथाओं में एक है। राजस्थान की कुछ जातियों में पत्नी अपने पति को छोड़ कर किसी अन्य पुरुष के साथ रह सकती है। इसे ‘नाता करना’ कहते हैं। इसमें कोई औपचारिक रीति रिवाज नहीं करना पड़ता। केवल आपसी सहमति ही होती है। विधवा औरतें भी नाता कर सकती हैं।
विधानसभा में अनुदान मांगों पर बहस शुरू होने से पहले संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल की ओर से दिये गये स्पष्टीकरण से नाराज भाजपा विधायकों ने सदन से बर्हिगमन किया।
वीरांगना मंजू जाट को देवर के नाते जाने के बयान पर मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने सदन मे कहा, ‘‘मंजू जाट के बावत मैंने एक शब्द भी नहीं बोला और सिर्फ इतना सा बोला कि था कि उसका देवर पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे है। मैंने सुंदरी देवी के लिये कहा कि वो नाते चली गई थी।’’
विपक्षी भाजपा ने मंत्री के बयान को वीरांगनाओं का अपमान बताते हुए हंगामा किया और सदन से बर्हिगमन किया।
विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र राठौड़ ने कहा, ‘‘मंत्री स्पष्टीकरण कितना ही देदे.. राजस्थान की वीरांगनाओं को अपमान किया है मंत्री जी ने… अब सफाई देने से कुछ नहीं होगा।’’
कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा ने कहा कि बोलकर पलट जाना धारीवाल की आदत है। मदेरणा ने बुधवार को वीरांगना मंजू के नाते जाने के बयान और किरोड़ी को आतंकी कहने के बयान को लेकर धारीवाल पर निशाना साधा था।
उल्लेखनीय है कि संसदीय कार्य मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने सोमवार को सदन में कहा था कि शहीद रोहिताश लांबा की देवर तो पहले से शादीशुदा था। उसके दो बच्चे हैं। फिर वो उसके नाते चली गई। अब नाते जाकर कहती हैं कि मेरे देवर को नौकरी दो।
भाषा कुंज अर्पणा
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