उप्र के पर्यावरण प्रभाव निकाय व गाजियाबाद के जिलाधिकारी को अवैध खनन की जांच करने का निर्देश

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उप्र के पर्यावरण प्रभाव निकाय व गाजियाबाद के जिलाधिकारी को अवैध खनन की जांच करने का निर्देश

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  • Publish Date - May 22, 2026 / 06:40 PM IST,
    Updated On - May 22, 2026 / 06:40 PM IST

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) और गाजियाबाद के जिलाधिकारी को यमुना नदी में अवैध खनन के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया है।

एनजीटी एक मामले की सुनवाई कर रहा था जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि निजी कंपनी ‘मेसर्स न्यू पैंथर सिक्योरिटी गार्ड सर्विसेज’ ने गाजियाबाद में नियमों का उल्लंघन करते हुए यमुना नदी में अवैध खनन किया था।

अपने समक्ष मौजूद साक्ष्यों पर गौर करते हुए एनजीटी की एक पीठ ने कहा, ‘‘हमारा यह मत है कि प्रतिवादी-8 (मेसर्स न्यू पैंथर) अवैध गतिविधियों में संलिप्त था।’’

इसमें कहा गया है कि कंपनी को सितंबर 2021 में संशोधित पर्यावरण मंजूरी (ईसी) प्रदान की गई थी, जिसमें ‘‘नदी के भीतर’’ किसी भी खनन गतिविधि को प्रतिबंधित करने की विशिष्ट शर्त थी, और शर्तों के उल्लंघन के लिए ईसी वापस लेने का प्रावधान था।

एनजीटी ने कहा कि प्रतिवादी-8 के पक्ष में जारी ईसी को वापस लिया जा सकता है या नहीं और अवैध खनन की 23 घटनाओं के मद्देनजर उसके पक्ष में निष्पादित खनन पट्टा रद्द किया जा सकता है या नहीं, इस प्रश्न पर एसईआईएए और जिलाधिकारी द्वारा विचार किया जाना आवश्यक है।

अधिकरण ने एसईआईएए और जिलाधिकारी को अवैध खनन की घटनाओं की जांच करने और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार आवेदक और कंपनी को सुनवाई का अवसर देने के बाद क्रमशः ईसी वापस लेने और खनन पट्टे को रद्द करने के संबंध में उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

भाषा शफीक अविनाश

अविनाश