कोलकाता, पांच अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस शासनकाल में जारी जाति प्रमाण पत्रों का सत्यापन करने की प्रक्रिया बड़े पैमाने पर शुरू की है और इसके तहत 45,000 से अधिक दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अबतक 135 प्रमाणपत्रों को रद्द किया जा चुका है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अब तक कुल 1,22,117 जाति प्रमाण-पत्रों की दोबारा जांच की गई है और इनमें से 76,750 दस्तावेज, यानी लगभग 62.8 प्रतिशत, सही पाए गए हैं।
अधिकारी ने कहा कि लेकिन 45,000 से अधिक प्रमाण पत्रों को आगे की जांच के लिए चिह्नित किया गया है, जबकि 135 प्रमाण पत्रों को जांच-पड़ताल के बाद रद्द कर दिया गया है।
यह कवायद तृणमूल शासन के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एसी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण-पत्र जारी करने में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोपों के बाद की जा रही है।
राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह जांच अभियान यह सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है कि केवल पात्र लाभार्थियों के पास ही जाति प्रमाणपत्र रहें।
अधिकारी ने पहचान गुप्त रखते हुए ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘उद्देश्य तय नियमों के अनुसार प्रत्येक प्रमाणपत्र की सख्ती से जांच करना है। जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इस कवायद का मकसद प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि लाभ केवल पात्र लोगों तक ही पहुंचें।’’
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अधिकारियों को पिछली सरकार के दौरान जारी किए गए सभी जाति प्रमाण-पत्रों की जांच करने का निर्देश दिया था।
उन्होंने बताया कि जांच में खुलासा हुआ है कि अलग-अलग इलाकों में आयोजित ‘दुआरे सरकार’ शिविरों में बड़ी संख्या में जाति प्रमाण-पत्र जारी किए गए, जिनमें से कई कथित तौर पर बिना सही जांच-पड़ताल के ही जारी कर दिए गए थे।
भाषा धीरज नेत्रपाल
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