स्तन कैंसर और हृदय रोग से पीड़ित महिला का एक ही सर्जरी के तहत किया गया इलाज

स्तन कैंसर और हृदय रोग से पीड़ित महिला का एक ही सर्जरी के तहत किया गया इलाज

स्तन कैंसर और हृदय रोग से पीड़ित महिला का एक ही सर्जरी के तहत किया गया इलाज
Modified Date: July 17, 2026 / 08:31 pm IST
Published Date: July 17, 2026 8:31 pm IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने स्तन कैंसर और हृदय रोग से पीड़ित 65-वर्षीय एक महिला का छह घंटे तक चली एक ही सर्जरी के तहत सफलतापूर्वक इलाज किया। अस्पताल ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

शारदाकेयर-हेल्थसिटी के अनुसार, मरीज की एक ही सर्जरी के दौरान स्तन कैंसर के लिए ‘मोडिफाइ रैडिकल मास्टेक्टॉमी’ और ‘एओर्टिक वाल्व’ बदलने की सर्जरी तथा ‘कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग’ की गई।

अस्पताल ने दावा किया कि एक ही मरीज में ये तीनों गंभीर बीमारियां होना बेहद दुर्लभ है और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में यह इस तरह का पहला मामला है।

बयान के अनुसार, मीडिया क्षेत्र से सेवानिवृत्त हो चुकी महिला ने शुरुआत में दाएं स्तन में गांठ महसूस होने के बाद जांच कराई तो शुरुआती स्तर का स्तन कैंसर होने का पता चला। बयान में कहा गया है कि पहले स्तन को बचाने के लिए उनकी सर्जरी करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन ऑपरेशन से पहले की सामान्य जांच के दौरान चिकित्सक ने उनके हृदय की धड़कन में असामान्यता महसूस की, जिसके बाद हृदय की और जांच कराई गई।

बयान में कहा गया कि ‘इकोकार्डियोग्राम’ जांच में पता चला कि महिला को ‘बाइकस्पिड एओर्टिक वाल्व’ के कारण गंभीर ‘एओर्टिक स्टेनोसिस’ की समस्या है। बयान के अनुसार, यह एक जन्मजात स्थिति है।

बयान में कहा गया है कि ‘कोरोनरी एंजियोग्राफी’ में यह भी पता चला कि हृदय की मुख्य रक्त वाहिकाओं में से एक ‘लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग’ (एलएडी) कोरोनरी आर्टरी’ में 90 प्रतिशत तक रुकावट है।

चिकित्सकों ने बताया कि इन दो जानलेवा हृदय संबंधी समस्याओं के बावजूद मरीज ने हृदय से जुड़े किसी बड़े लक्षण की जानकारी नहीं दी थी।

उन्होंने कहा कि सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, कार्डियोलॉजी, कार्डियक एनेस्थीसिया और कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी के विशेषज्ञों की टीम ने मामले की समीक्षा की और इसके बाद तीनों प्रक्रियाएं एक ही ऑपरेशन में करने का फैसला लिया।

अस्पताल के बयान के अनुसार, स्तन बचाने वाली सर्जरी के बाद रेडियोथेरेपी की जरूरत पड़ती, जबकि मरीज को तुरंत ओपन हार्ट सर्जरी की भी आवश्यकता थी।

बयान में कहा गया है कि इसलिए मरीज और उसके परिवार की सहमति लेने के बाद टीम ने हृदय की सर्जरी के साथ ‘मोडिफाइड रैडिकल मास्टेक्टॉमी’ करने का फैसला किया।

कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी के वरिष्ठ निदेशक और प्रमुख डॉ. अखिल कुमार रस्तोगी ने कहा, ‘‘एओर्टिक वाल्व बहुत ज्यादा संकुचित था, जिससे यह प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण बन गई थी। तीनों सर्जरी एक साथ करने के लिए कई विशेषज्ञ विभागों के बीच सावधानीपूर्वक योजना और बेहतर तालमेल की जरूरत थी।’

उन्होंने कहा, ‘इस संयुक्त प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने से न केवल संभावित जानलेवा हृदय समस्या को रोका गया, बल्कि मरीज के कैंसर के इलाज में भी देरी नहीं हुई।’

डॉ. रस्तोगी ने कहा कि यह मामला ऑपरेशन से पहले पूरी जांच के महत्व को बताता है, क्योंकि मरीज में गंभीर हृदय समस्याएं होने के बावजूद कोई बड़े लक्षण नहीं थे।

सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार और यूनिट प्रमुख डॉ. हेमकांत वर्मा ने कहा कि हृदय की गंभीर बीमारी का पता चलने के बाद इलाज की पूरी योजना बदलनी पड़ी।

उन्होंने कहा, ‘केवल कैंसर की सर्जरी करने के बजाय एक ऐसी संयुक्त रणनीति बनाई गई, जिसमें एक ही ऑपरेशन में मरीज की सभी बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज किया जा सके। इससे न केवल कैंसर का समय पर इलाज हुआ, बल्कि मरीज को कई बड़ी सर्जरी और अलग-अलग रिकवरी अवधि से भी बचाया गया।’

अस्पताल ने बताया कि ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी में कोई परेशानी नहीं हुई।

अस्पताल के अनुसार, बाद में की गई इकोकार्डियोग्राम जांच में पता चला कि बदला गया वाल्व सामान्य रूप से काम कर रहा है, हृदय की कार्यक्षमता अच्छी थी और वाल्व में रिसाव या अन्य कोई समस्या नहीं थी।

बयान में कहा गया कि मरीज को स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और कैंसर के इलाज के लिए उनकी नियमित जांच जारी है।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश


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