महिला पेशेवरों ने कर्नाटक सरकार की मासिक धर्म अवकाश नीति के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया

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महिला पेशेवरों ने कर्नाटक सरकार की मासिक धर्म अवकाश नीति के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया

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  • Publish Date - March 28, 2026 / 12:40 AM IST,
    Updated On - March 28, 2026 / 12:40 AM IST

बेंगलुरु, 27 मार्च (भाषा) कर्नाटक उच्च न्यायालय में 15 महिला पेशेवरों के एक समूह ने एक याचिका दायर कर राज्य सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी है जिसमें कामकाजी महिलाओं को प्रति माह एक दिन का सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश प्रदान किया गया है।

राज्य में विभिन्न संगठनों में कार्यरत महिलाओं ने 23 मार्च को याचिका दायर कर 20 नवंबर, 2025 की सरकारी अधिसूचना को रद्द करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने इस नीति को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 का उल्लंघन बताया।

इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए एक अप्रैल की तारीख तय की गयी है।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यह उन पूर्वाग्रहों को और मजबूत करता है जिनसे महिलाओं ने दशकों तक लड़ने के बाद पार पाने की कोशिश की है और इससे अनिवार्य रूप से भर्ती तथा पदोन्नति में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव होगा।

भाषा

गोला संतोष

संतोष