विश्व और अधिक बहुध्रुवीय बन रहा, वैश्विक व्यवस्था का लोकतंत्रीकरण भी जारी : जयशंकर

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विश्व और अधिक बहुध्रुवीय बन रहा, वैश्विक व्यवस्था का लोकतंत्रीकरण भी जारी : जयशंकर

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 03:20 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 03:20 PM IST

राजगीर, 31 मार्च (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अधिक लोकतांत्रिक होती नजर आ रही है, विभिन्न संस्कृतियों और समाजों की बढ़ती मुखरता के कारण दुनिया अब एक नए एवं अधिक बहुध्रुवीय स्वरूप की ओर अग्रसर है।

जयशंकर बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारेाह को संबोधित कर रहे थे । इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे ।

विदेश मंत्री ने कहा, “दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय होती जा रही है, क्योंकि अब कई अन्य समाज एवं संस्कृतियां अपनी आवाज प्रभावी ढंग से उठा रही हैं। ऐसे समय में नालंदा की परंपरा वैश्विक व्यवस्था के लोकतंत्रीकरण को नई दिशा देने में एक सशक्त प्रभाव डाल सकती है।”

उन्होंने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शिक्षा का ऐसा केंद्र था, जहां दूर-दूर से छात्र और विद्वान आते थे।

उन्होंने कहा, “नालंदा शब्द ही भारत की बौद्धिक विरासत और सांस्कृतिक वैभव की स्मृतियां जगाता है। इस संस्थान में उस परंपरा का पुनर्जीवन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया के उदय का संकेत है।”

मंत्री ने यह भी कहा कि विश्व में “विकास और प्रगति की दिशा” को लेकर “गंभीर बहस” चल रही है।

उन्होंने कहा, “इन दिनों अधिकांश विमर्श स्वाभाविक रूप से प्रौद्योगिकी के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है, लेकिन नालंदा की मूल भावना हमें यह स्मरण कराती है कि हर पहलू का एक मानवीय पक्ष भी होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

जयशंकर ने उम्मीद जताई कि “अंतरराष्ट्रीय छात्र” अपने-अपने देशों में लौटकर भारत की समझ और देश की छवि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि आप सभी ने यहां अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है और आप अपने साथ भारत का एक अंश लेकर जा रहे हैं, जो आगे भी आपसे जुड़ा रहेगा।’’

भाषा कैलाश मनीषा रंजन

रंजन

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