आइजोल, 30 जून (भाषा) मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जोरमथंगा ने 1986 के मिज़ोरम शांति समझौते को भारत का ‘‘सबसे सफल’’ शांति समझौता करार देते हुए मंगलवार को कहा कि भविष्य में समझौते का महत्व और इसकी उपयोगिता और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएगी।
एमएनएफ ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में शांति समझौते पर हस्ताक्षर की 40वीं वर्षगांठ मनाई। यह दिवस स्थानीय रूप से ‘‘रेमना नी’’ के नाम से जाना जाता है।
सैतुअल जिले के थिंगसुल्थलियाह में ‘‘रेमना नी’’ के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए जोरमथंगा ने शांति प्रक्रिया में चर्च, नागरिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और मिजोरम के आम नागरिकों समेत योगदान देने वाले सभी को याद किया।
जोरमथंगा ने कहा, ‘‘आज हम जिस शांति समझौते को याद कर रहे हैं, वह एमएनएफ और भारत सरकार के बीच हुआ था। समय के साथ यह देश के सबसे सफल शांति समझौतों में से एक साबित हुआ है। आने वाले समय में इसका महत्व और इसकी उपयोगिता और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएगी।’’
उन्होंने दावा किया कि मिजोरम शांति समझौता संघर्षों के समाधान का एक आदर्श मॉडल बन चुका है और स्थायी शांति की तलाश कर रहे पड़ोसी क्षेत्रों के बीच भी यह निरंतर रुचि और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
उन्होंने मिजोरम के लोगों से उस शांति समझौते को संरक्षित और सुरक्षित रखने का आह्वान किया।
भाषा आशीष पवनेश
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