Image Source: Screengrab/ The Economic Times
Kantara Chapter 1 Review: फिल्म “कांतारा चैप्टर 1” अब सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है, ये ऋषभ शेट्टी की धमाकेदार फिल्म है जो 7 अलग-अलग भाषाओं में दर्शकों के सामने आई है। कोविड के समय रिलीज हुई फिल्म ‘कांतारा’ ने 2022 में अपने दैवीय रहस्यों और लोककथाओं वाले स्टाइल से दर्शकों का दिल जीत लिया था। 16 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने देसी बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई करते हुए 309.64 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। ये सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर ही नहीं बनी, बल्कि एक सांस्कृतिक फिनोमिना भी बन गई। तभी से ही लोग इसके प्रीक्वल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब ऋषभ शेट्टी की लिखी और डायरेक्ट की गई और अभिनीत ‘कांतारा: चैप्टर 1’ दशहरे पर बड़े पर्दे पर आई है। चलिए जानते हैं कैसी है फिल्म और इसे देखने जाना चाहिए या नहीं।
ऋषभ शेट्टी ने इस बार भी दिखा दिया कि वो एक अच्छे डायरेक्टर और एक्टर के साथ साथ एक सच्चे कहानीकार भी हैं। फिल्म का हर फ्रेम विज़ुअल आर्ट जैसा लगता है और बैकग्राउंड स्कोर तो रौंगटे खड़े कर देने वाला है। ऋषभ शेट्टी बर्मे के रोल में एकदम फिट बैठे हैं। उनका अभिनय इतना रियल और पावरफुल है कि आप आसानी से उनके कैरक्टर के साथ जुड़ जाते हैं। ये उनकी अब तक की सबसे यादगार परफॉर्मेंस कही जा सकती है।फिल्म में संस्कृति, रहस्य और भावना का ऐसा संतुलन है, जो बहुत कम फिल्मों में देखने को मिलता है। ऑडियंस इस फिल्म के लिए सोशल मीडिया पर जमकर प्यार लुटा रहे हैं, लोग कह रहे हैं, “ये सिर्फ फिल्म नहीं, एक भावना है!” टिकट खिड़कियों से लेकर ऑनलाइन बुकिंग तक हर जगह फिल्म के लिए ज़बरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है।
कहानी शुरू होती है कर्नाटक के एक काल्पनिक गांव “कांतारा” से जहां लोग जंगल और अपने रक्षक “गणों” पर गहरा भरोसा करते हैं। ये गांव अपनी आस्था और परंपराओं को लेकर बेहद संवेदनशील है। लेकिन इस शांति को भारी खतरा मंडरा रहा है एक लालची राजा और उसका बेटा कुलसेखर जो कांतारा की जमीन और ताकत पर कब्जा जमाना चाहते हैं। कुलसेखर अपनी जिद और सत्ता के लिए गांव वालों पर जुल्म ढाता है और उनका शोषण करता है। लेकिन गांव के आदिवासी नेता बर्मे सामने आते हैं, जो अपने दिमाग और बहादुरी से कुलसेखर की सारी चालों को नाकाम कर देते हैं। बर्मे एक खास “गुलिका अनुष्ठान” करके कुलसेखर की जान ले लेते हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती इसी बीच कनकवती की एंट्री होती है, जो इस पूरी कहानी में नया ट्विस्ट और ज़ोरदार मसाला जोड़ देती है।
Kantara Chapter 1 Review: ऋषभ शेट्टी ने फिल्म को एकदम रॉ और रियल रखा है जिससे कहानी का टोन सही तरीके से दर्शकों तक पहुंचा। अरविंद एस. कश्यप की सिनेमैटोग्राफी जंगल और गांव की खूबसूरती को बेहतरीन तरीके से कैमरे में कैद करती है। प्रोडक्शन डिजाइन में आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को सटीक तरीके से दिखाया गया है। फिल्म के एक्शन सीन्स ऑडियंस की फिल्म में दिलचस्पी बनाए रखते हैं और सही टाइमिंग पर डाली गई कॉमेडी सीन फिल्म को हल्का-फुल्का भी बनाते हैं। हालांकि कुछ सीन की रफ्तार धीमी लगती है जो फिल्म के मज़े में थोड़ा ब्रेक डालती है। लेकिन ये कोई नई बात नहीं है की हिंदी डबिंग में कभी-कभी भावनात्मक गहराई कम नजर आती है।
अजनीश लोकनाथ का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के मूड को परफेक्ट बनाता है। गाने कहानी और माहौल को और भी प्रभावशाली करते हैं।
“कांतारा चैप्टर 1” सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़ा अनोखा एक्सपीरियंस है। इसमें लोककथाओं, आस्था और जंगल के रहस्यों को शानदार विजुअल्स और जोरदार एक्टिंग के साथ दिखाया गया है। कुछ ग्राफिक्स थोड़े कमजोर जरूर हैं लेकिन कुल मिलाकर ये फिल्म देखने लायक और मज़ेदार है। अगर आपको रहस्य, एक्शन और सांस्कृतिक कहानियां पसंद हैं तो “कांतारा” को मिस न करें।
इन्हें भी पढ़ें- Abhishek Bachchan and Aishwarya Rai: बॉलीवुड के इस कपल ने फिर थामा कानूनी रास्ता, रखी 4 करोड़ की बड़ी मांग!