Food Divorce in Relationship: पति-पत्नी के बीच अब खाने का भी ‘डिवोर्स’! आखिर क्या है ‘फूड डिवोर्स’ और क्यों बढ़ रहा इसका चलन?

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Food Divorce in Relationship: कपल्स की खाने की पसंद और समय अक्सर अलग-अलग होते हैं। एक पार्टनर घर का बना हल्का और पौष्टिक खाना पसंद करता हो तो दूसरा बाहर का बना खाना खाना चाहता है। इसी तरह किसी को शाम को जल्दी भूख लगती है तो दूसरा देर रात खाना पसंद करता है।

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  • Publish Date - August 16, 2026 / 05:11 PM IST,
    Updated On - August 16, 2026 / 05:19 PM IST

(Food Divorce in Relationship/ Image Credit: AI-generated)

HIGHLIGHTS
  • फूड डिवोर्स का मतलब रिश्ता तोड़ना नहीं है।
  • दोनों अपनी पसंद का खाना खा सकते हैं।
  • खाने को लेकर रोज की बहस कम हो सकती है।

Food Divorce in Relationship: आजकल पति-पत्नी या पार्टनर के बीच छोटी-मोटी बहस होना आम बात है। लेकिन कई बार बिना किसी बड़े मुद्दे के भी रोज तनाव होने लगता है। इसकी वजह अक्सर एक छोटा सा सवाल होता है- आज खाने में क्या बनेगा? एक पार्टनर घर का हल्का और हेल्दी खाना चाहता है तो दूसरे को मन बाहर का खाना खाने का होता है। किसी को जल्दी भूख लगती है तो को ई देर रात खाना पसंद करता है। जब खाने की पसंद बार-बार बहस की वजह बनने लगे तो कुछ कपल्स ‘फूड डिवोर्स’ का (Food Divorce in Relationship) तरीका अपना रहे हैं।

क्या है फूड डिवोर्स?

नाम सुनकर लगता है कि शायद कपल्स एक-दूसरे से अलग हो रहे हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। फूड डिवोर्स का मतलब (Food Divorce in Relationship) सिर्फ खाने को लेकर अपनी-अपनी पसंद की आजादी देना है। दोनों साथ रहते हैं और उनका रिश्ता सामान्य रहता है, लेकिन हर दिन एक ही खाना खाने की जरूरत नहीं होती। अगर एक को रोटी-सब्जी पसंद है और दूसरे को नूडल्स या पास्ता, तो दोनों अपनी पसंद का खाना खा सकते हैं। इसी तरह दोनों चाहें तो अलग-अलग समय पर भी खाना खा सकते हैं।

जब रोज का सवाल बन जाए परेशानी

शाम होते ही कई घरों में सवाल शुरू हो जाता है- आज क्या खाएं? इसके बाद दोनों एक-दूसरे से पूछते रहते हैं और कोई फैसला नहीं हो पाता। एक को चावल चाहिए तो दूसरे को पास्ता, एक घर का खाना चाहता है तो दूसरा ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना चाहता है। कभी-कभी यह छोटी बात रोज की बहस बन जाती है। खाना मंगाने, बनाने और पार्टनर की पसंद का ध्यान रखने की जिम्मेदारी भी तनाव बढ़ा सकती है। ऐसे में अलग-अलग पसंद का खाना चुनना कुछ लोगों को तनाव कम करने का आसान विकल्प बन सकता है।

हर बार समझौता करना जरूरी नहीं

फूड डिवोर्स का मतलब यह भी नहीं है कि कपल कभी साथ खाना (Food Divorce in Relationship) नहीं खाएंगे। जब दोनों की पसंद मिले, तो वे साथ बैठकर खाना खा सकते हैं। वीकेंड पर साथ नाश्ता या बाहर डिनर भी किया जा सकता है। फर्क सिर्फ इतना है कि अगर किसी दिन पसंद अलग हो, तो किसी एक को अपनी इच्छा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। इससे खाने को लेकर होने वाली बेवजह की बहस कम हो सकती है और दोनों अपनी सुविधा के अनुसार फैसला कर सकते हैं।

किन लोगों के लिए हो सकता है उपयोगी?

हर व्यक्ति की खाने की आदत अलग होती है। किसी को हेल्दी डाइट पसंद होती है, किसी को बाहर का खाना। वहीं शाकाहारी या मांसाहारी पसंद, एलर्जी और कुछ चीजों से परहेज भी खाने के फैसले को मुश्किल बना सकते हैं। फूड डिवोर्स ऐसे कपल्स के लिए उपयोगी हो सकता है,जिन्हें रोज खाने की पसंद को लेकर तनाव होता है। इसका उद्देश्य रिश्ते में दूरी बनाना नहीं, बल्कि छोटी-सी बात को बड़े विवाद में बदलने से रोकना है।

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फूड डिवोर्स क्या होता है?

फूड डिवोर्स का मतलब रिश्ता खत्म करना नहीं है। इसमें कपल खाने की पसंद अलग रखने की आजादी देते हैं।

क्या फूड डिवोर्स में कपल अलग-अलग खाना खाते हैं?

हां, अगर दोनों की पसंद अलग है तो वे अपनी-अपनी पसंद का खाना खा सकते हैं।

क्या इससे रिश्ते में दूरी बढ़ सकती है?

जरूरी नहीं। सही तरीके से अपनाने पर यह रोज की छोटी-छोटी बहस और तनाव को कम कर सकता है।

क्या कपल कभी साथ खाना नहीं खा सकते?

ऐसा बिल्कुल नहीं है। जब दोनों की पसंद एक हो या खास मौका हो, तो वे साथ खाना खा सकते हैं।