शह मात The Big Debate: संघ-शाखा की दौड़, ब्यूरोक्रेट्स में होड़! मंत्री विजयवर्गीय के बयान ने फिर बढ़ाया सियासी पारा, क्या संघ में बढ़ रही मौकापरस्तों की भीड़?

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Kailash Vijayvargiya Controversial Statement: एमपी के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों ब्यूरोक्रेसी से खफा मालूम पड़ रहे हैं।

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  • Publish Date - June 27, 2026 / 11:42 PM IST,
    Updated On - June 27, 2026 / 11:42 PM IST

Kailash Vijayvargiya Controversial Statement/Image Credit: IBC24.in

HIGHLIGHTS
  • कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों ब्यूरोक्रेसी से खफा मालूम पड़ रहे हैं।
  • कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि- उनके पास अधिकारी आ-आ कर अपनी संघनिष्ठा प्रकट करते हैं।
  • कांग्रेस सार्वजनिक मंचों से आरोप लगाती रही है कि एमपी के कई अधिकारी संघी विचारधारा के हो गए हैं।

Kailash Vijayvargiya Controversial Statement: भोपाल: अक्सर अपने बयानों से सुर्खियां बटोरने वाले एमपी के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों ब्यूरोक्रेसी से खफा मालूम पड़ रहे हैं। ताजा मामला भोपाल में RSS के वरिष्ठ प्रचारक रहे शालिगराम तोमर की स्मृति कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम मोहन की मौजूदगी में कहा कि- उनके पास अधिकारी आ-आ कर अपनी संघनिष्ठा प्रकट करते हैं। साथ ही उन्होंने ऐसे लोगों को संकेतों में छद्म संघी भी कह दिया। यानी ब्यूरोक्रेसी भी अपना अनुकूलन बनाने के लिए ख़ुद को RSS से जुड़ा हुआ प्रचारित कर रही है।

कांग्रेस तो कई बार सार्वजनिक मंचों से भी ये आरोप लगाती रही है कि एमपी के कई अधिकारी संघी विचारधारा के हो गए हैं। कमलनाथ और जीतू पटवारी अपने कई भाषणों में कह चुके हैं कि एमपी के अधिकारी भाजपा का बिल्ला जेब में लेकर घूमते हैं..कांग्रेस उन्हें चेतावनी भी दे चुकी है।

लेकिन सवाल ये कि एमपी के तकरीबन साढ़े पांच लाख अधिकारी कर्मचारियों में से कितनों ने स्वार्थ के चलते संघ का दामन थामा है? सवाल ये कि क्या नए संघियों के आगमन से पुराने संघी असहज हो रहे हैं? सवाल ये भी कि कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान को पीड़ा समझा जाए या ब्यूरोक्रेसी पर चुटकी? सवाल ये कि क्या मलाईदार पोस्टिंग और मनचाहे जिले में ट्रासंफर की वांछित योग्यता में संघी होना ज़रूरी है? और सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या किसी अधिकारी का संघी होना गुनाह है?

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