मध्यप्रदेश में गेहूं खरीद में देरी पर किसान संगठनों ने आक्रोश जताया, आंदोलन की चेतावनी दी

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मध्यप्रदेश में गेहूं खरीद में देरी पर किसान संगठनों ने आक्रोश जताया, आंदोलन की चेतावनी दी

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  • Publish Date - April 1, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - April 1, 2026 / 07:00 PM IST

इंदौर, एक अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की सरकारी खरीद में देरी को लेकर किसान संगठनों ने बुधवार को गहरी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार पर व्यवस्थाओं में लापरवाही का आरोप लगाया।

संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि व्यवस्थाओं में जल्द सुधार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर हो जाएंगे।

मध्यप्रदेश, देश के शीर्ष गेहूं उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार ने निर्णय किया है कि वह गेहूं की खरीद के दौरान किसानों को 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी के साथ ही 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी देगी। यानी राज्य सरकार द्वारा किसानों का गेहूं 2,625 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर खरीदा जाएगा।

भारतीय किसान संघ के मालवा प्रांत (इंदौर-उज्जैन संभाग) के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पटेल ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा,‘‘हर वर्ष 15 मार्च के आस-पास एमएसपी पर गेहूं की सरकारी खरीद शुरु हो जाती है, लेकिन इस साल इसकी तारीख लगातार बढ़ाई जा रही है।’’

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से ‘गलत दावा’ किया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से प्लास्टिक की बोरियों की किल्लत के चलते गेहूं खरीद टल रही है।

पटेल ने कहा,‘‘गेहूं खरीद में देरी के कारण बैंकों और सहकारी समितियों का कर्ज नहीं चुका पाने से करीब 60 प्रतिशत किसान बकायादार घोषित किए गए हैं। दूसरी ओर, व्यापारी इस स्थिति का नाजायज फायदा उठाकर मंडियों में एमएसपी से कम कीमत पर किसानों का गेहूं खरीद रहे हैं।’’

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बबलू जाधव ने कहा कि राज्य में गेहूं खरीद को लेकर राज्य सरकार की कथित तौर पर असंगत और अव्यवस्थित नीतियों ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है।

उन्होंने कहा,‘‘शुरुआत में गेहूं खरीद की तारीख 15 मार्च घोषित की गई थी। फिर इसे एक अप्रैल तक बढ़ा दिया गया। अब इसे 10 अप्रैल कर दिया गया है। कुछ संभागों में 15 अप्रैल से खरीद शुरू करने का निर्णय लिया गया है। यह देरी किसानों के साथ सीधा अन्याय और उनकी मेहनत पर कुठाराघात है।’’

जाधव ने चेतावनी दी कि यदि एमएसपी पर गेहूं की सरकारी खरीद की व्यवस्थाओं को जल्द दुरुस्त नहीं किया गया और किसानों को राहत देने के लिए ऋण भुगतान की तारीख नहीं बढ़ाई गई, तो अन्नदाता बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। भाषा हर्ष जोहेब

जोहेब