भोपाल, आठ जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत और नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े भुगतान विवाद को लेकर चार राज्यों के बीच हुए समझौते को बुधवार को राज्य के लिए ‘उपलब्धि’ करार दिया जबकि विपक्षी कांग्रेस ने उनपर चौतरफा निशाना साधते हुए ‘गुजरात लॉबी’ के सामने राज्य के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया।
नर्मदा अवार्ड के लाभार्थी राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं और इन राज्यों के बीच सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण की लागत साझा के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को लेकर समझौता हुआ है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की पहल पर मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें लंबित धनराशि के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है।
राजधानी भोपाल में मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में यादव ने कहा कि विगत 30 वर्ष से सरदार सरोवर परियोजना को लेकर लंबित जटिल मुद्दे का सर्वसम्मति से समाधान हुआ है।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री यादव ने इस ‘उपलब्धि’ के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के अटॉर्नी जनरल ने फरवरी 2026 में राय दी थी कि पुनर्वास की लागत भागीदार राज्यों के बीच विभाजित होनी चाहिए।
बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा, ‘राय के अनुसार मध्यप्रदेश को लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये का भुगतान करने की स्थिति बन रही थी। नयी दिल्ली में हुई बैठक में तय किया गया कि 50 प्रतिशत के स्थान पर 75 प्रतिशत खर्च गुजरात ही करेगा और इस प्रकार मध्यप्रदेश को अब केवल रूपये 217 करोड़ रुपये की राशि देनी होगी।’
इससे पहले, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि सरदार सरोवर बांध परियोजना के मुआवजे के तौर पर मध्यप्रदेश ने 7669 करोड़ रुपये की मांग की थी लेकिन मंगलवार को हुए समझौते के बाद मध्यप्रदेश की सरकार को गुजरात सरकार को 550 करोड़ रुपये देने होंगे।
उन्होंने कहा, ‘जिस मध्यप्रदेश ने सरदार सरोवर परियोजना के लिए अपनी जमीन दी, अपने जंगल दिए, अपने गांव डुबोए और लाखों लोगों का विस्थापन झेला, उसी मध्यप्रदेश की सरकार ने गुजरात सरकार से 7,669 करोड़ रुपये का मुआवज़ा मांगा था।’
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘लेकिन मोहन यादव जी ने प्रदेश के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय गुजरात सरकार से समझौता कर लिया और अब उल्टा 550 करोड़ रुपये गुजरात को देने पर सहमति जता दी।’
पटवारी ने कहा कि मां नर्मदा का उद्गम मध्यप्रदेश में है और इसका अधिकांश प्रवाह भी यहीं है फिर भी प्रदेश के अनेक हिस्से आज भी सिंचाई और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, गांवों तक नहरें नहीं पहुंचतीं, लेकिन मध्यप्रदेश के हिस्से का पानी और उसके संसाधनों का लाभ कहीं और पहुंच जाता है।
उन्होंने कहा, ‘पूरा प्रदेश देख रहा है कि किस तरह आज मोहन सरकार ने नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के सामने मध्य प्रदेश के हितों से समझौता कर लिया।’
उन्होंने कहा, ‘मोहन यादव जी आज गुजरात लॉबी के सामने दंडवत प्रणाम करते हुए नतमस्तक हैं।’
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने वर्षों से लंबित नर्मदा जल विवाद में एक विवादास्पद समझौता किया है।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर मध्यप्रदेश के अधिकारों से समझौता किसके हित में किया गया और जब प्रदेश ने स्वयं हजारों करोड़ रुपये का दावा किया था तो फिर इतनी बड़ी राशि छोड़ने का फैसला क्यों लिया गया?
उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे समझौते की शर्तें और तथ्य जनता के सामने सार्वजनिक करने की मांग की।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री यादव ने सरदार सरोवर के लगभग 7,770 करोड़ रुपये मुआवजे का मध्यप्रदेश का हक गुजरात के पक्ष में छोड़ दिया।
उन्होंने भी दावा किया कि उलटे मध्यप्रदेश अब 550 करोड़ रुपये गुजरात को देगा, जबकि सरदार सरोवर का सबसे बड़ा लाभार्थी गुजरात है।
सिंह ने आरोप लगाया, ‘दबाव में आकर मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश का पक्ष सशक्त रूप से नहीं रखा और प्रदेश के हितों की अनदेखी करते हुए चुपचाप समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया। उनका यह कारनामा सरदार सरोवर के कारण डूब में आने वाले 192 गांवों के किसानों के साथ धोखा है।’
केंद्रीय गृह मंत्री ने मंगलवार को राजधानी दिल्ली में हुए इस समझौते पर कहा था कि किसी भी विवाद से होने वाले राष्ट्रीय नुकसान को ध्यान में रख कर उसे सुलझाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि पड़ोसी राज्य समृद्ध होता है, तो उसका लाभ अपने राज्य को भी मिलता है।
भाषा ब्रजेन्द्र जोहेब
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