भोपाल गैस पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने सीवेज-दूषित पानी की आपूर्ति का आरोप लगाया

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भोपाल गैस पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने सीवेज-दूषित पानी की आपूर्ति का आरोप लगाया

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  • Publish Date - July 31, 2026 / 07:23 PM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 07:23 PM IST

भोपाल, 31 जुलाई (भाषा) भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने वाले चार संगठनों ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश की राजधानी में परित्यक्त यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास के रिहायशी इलाकों में नगर निगम सीवेज से दूषित पेयजल की आपूर्ति कर रहा है।

संगठनों ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र का भी उल्लेख किया, जहां पिछले वर्ष दिसंबर में दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण 22 लोगों की मौत हो गई थी।

संगठनों ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एक रिपोर्ट जारी करते हुए दावा किया कि इस महीने 30 बस्तियों से एकत्रित पाइपलाइन के 63 पेयजल नमूनों में से 43 में मलजनित कोलीफॉर्म जीवाणु पाए गए, जो सीवेज से जल के दूषित होने का संकेत है।

ये संगठन दिसंबर 1984 की यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी के पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदियों में से एक इस हादसे में 5,479 लोगों की मौत हुई थी।

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने दावा किया कि सर्वेक्षण में शामिल 30 बस्तियों में से 19 में आपूर्ति किए जा रहे पेयजल में मलजनित प्रदूषण पाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अपर लेक से आपूर्ति किए जाने वाले पानी के 90 प्रतिशत तथा कोलार बांध से आपूर्ति होने वाले पानी के 25 प्रतिशत नमूने मलजनित प्रदूषण से प्रभावित पाए गए।

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि परित्यक्त कारखाने के आसपास की बस्तियों के निवासी जलजनित बीमारियों से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि परिवारों में दस्त और उल्टी के मामले सामने आ रहे हैं, जबकि निजी चिकित्सालयों में टाइफाइड के बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2004 में इन बस्तियों में पाइपलाइन से पेयजल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था, क्योंकि उसे बताया गया था कि कारखाना परिसर में कथित रूप से डाले गए खतरनाक अपशिष्ट के कारण भूजल विषैले रसायनों और भारी धातुओं से दूषित हो गया है।

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अगस्त 2018 में भोपाल नगर निगम (बीएमसी) को सीवर लाइन बिछाने और उचित जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। यह निर्देश पाइपलाइन के पेयजल में मलजनित प्रदूषण की शिकायतों के बाद दिया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘बीएमसी ने अदालत को आश्वासन दिया था कि तीन महीने के भीतर यह काम पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन पिछले आठ वर्षों में इस दिशा में कुछ नहीं किया गया।’

‘भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन’ की रचना ढींगरा ने कथित रूप से दूषित पेयजल की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सीवरेज और ड्रेनेज परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने तथा पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी के लिए स्वतंत्र व्यवस्था बनाने की भी मांग की।

इस संबंध में भोपाल नगर निगम के जल कार्य विभाग के सिटी इंजीनियर उदित गर्ग से बार-बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

भाषा दिमो आशीष

आशीष