नागपुर, 10 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) विधेयक ‘‘राष्ट्र विरोधी गतिविधियों’’ पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने विपक्षी कांग्रेस के इस आरोप को खारिज कर दिया कि यह ईसाई-विरोधी है।
नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि प्रस्तावित कानून उन सभी संगठनों पर लागू होगा जिन्हें विदेशी अंशदान मिलता है, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय से जुड़े हों, और इससे वैध काम करने वाले संगठनों को कोई परेशानी नहीं होगी।
इस साल जून में, सरकार ने विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए एफसीआरए नियमों में बदलाव को अधिसूचित किया था। इसके तहत, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को काम के उद्देश्यों और क्षेत्रों की पूर्व निर्धारित सूची में से चयन करना अनिर्वाय कर दिया गया। धर्म से जुड़ी कई तरह की गतिविधियों की अनुमति देते हुए, इन नियमों में स्पष्ट रूप से धर्मांतरण को उन श्रेणियों से बाहर रखा गया जो एफसीआरए के तहत पंजीकरण के लिए पात्र हैं।
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) समेत ईसाई संगठनों ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित कानून और हाल में लागू किए गए नियमों को वापस लेने की अपील की है।
फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस संशोधन को लाने का कारण यह है कि कुछ संगठन एफसीआरए का इस्तेमाल करके देश में (विदेशी) धन ला रहे हैं और उसका इस्तेमाल देश-विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। जो लोग अच्छा काम करते हैं, उनके लिए यह विधेयक कोई रुकावट या परेशानी पैदा नहीं करेगा। एफसीआरए के नियम लागू रहेंगे। जो लोग अपने कामकाज का हिसाब देंगे, उनका लाइसेंस भी कायम रहेगा।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले पर सकारात्मक रुख रखती है और यह किसी एक समुदाय का मुद्दा नहीं है। एफसीआरए सिर्फ ईसाई संगठनों के लिए नहीं है, बल्कि इसमें धर्म और समुदाय से परे सभी संगठन शामिल हैं।
एफसीआरए विधेयक को लेकर चिंता जताने वाले एक अमेरिकी सांसद के बयान के बारे में पूछे जाने पर फडणवीस ने कहा कि यह बयान ही प्रदर्शित करता है कि यह कानून लाना क्यों जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं फिर कहूंगा कि केंद्र सरकार सबकी बात सुनती है। यह विधेयक किसी एक समुदाय के ख़िलाफ नहीं है। अगर कोई समुदाय या कोई संस्था विदेश से अंशदान प्राप्त करना चाहती है, तो उन्हें एफसीआरए मंजूरी लेनी होगी।’’
एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और उम्मीद है कि इस हफ्ते संसद में इस पर चर्चा होगी।
उन्होंने सोमवार को विपक्षी राकांपा (शरदचंद्र पवार) सांसदों के प्रतिनिधिमंडल की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ होने वाली बैठक को ‘‘अच्छी चीज’’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री देश के होते हैं, न कि किसी एक पार्टी के। मुझे नहीं लगता कि उनसे मिलने में कोई मुश्किल है। मैं भी मुख्यमंत्री हूं और विपक्षी दलों के कई नेता मुझसे मिलने आते हैं। वे मुझे अपने काम के बारे में बताते हैं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि इसे किसी अलग नजरिए से देखने की कोई वजह है।’’
भाषा सुभाष रंजन
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