धर्म गुरुओं को ‘निशाना बनाने’ के लिए राकांपा (शप) प्रवक्ता विकास लवांडे पर स्याही फेंकी गई

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धर्म गुरुओं को 'निशाना बनाने' के लिए राकांपा (शप) प्रवक्ता विकास लवांडे पर स्याही फेंकी गई

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  • Publish Date - May 9, 2026 / 10:39 PM IST,
    Updated On - May 9, 2026 / 10:39 PM IST

पुणे, नौ मई (भाषा) महाराष्ट्र के पुणे जिले में शनिवार को कीर्तनकार संग्राम भंडारे के नेतृत्व में कुछ लोगों के एक समूह ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के प्रवक्ता विकास लवांडे पर स्याही फेंकी और उन पर प्रमुख धर्म गुरुओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

हवेली तहसील के म्हाटोबाची आलंदी में हुई घटना के एक वायरल वीडियो में देखा गया है कि भंडारे और उसके साथी लावंडे के पास जाकर उनके ‘घुसपैठिए’ वाले बयान पर स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।

वीडियो में भंडारे लावंडे पर स्याही फेंकते हुए कहते हैं, ‘अगर तुम्हें किसी को घुसपैठिया कहना था, तो मुझे कहो। हमारे गुरुओं को घुसपैठिया कहने की हिम्मत मत करना.. वे हमारे लिए सब कुछ हैं।’

भंडारे ने लावंडे को यह भी चेतावनी दी कि अगर उन्होंने इन आध्यात्मिक हस्तियों के खिलाफ बोलना या उन्हें परेशान करना जारी रखा तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

लावंडे हाल ही में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, काली चरण, प्रदीप शर्मा और स्वामी आनंद स्वरूप जैसे नेताओं के खिलाफ मुखर रहे हैं और उन्होंने इन आध्यात्मिक हस्तियों को भाजपा और आरएसएस द्वारा महाराष्ट्र में लाए गए उत्तर भारत के ‘घुसपैठिए’ बताया था।

उन्होंने दावा किया कि ये नेता ‘मनुवादी’ हैं जिन्हें महाराष्ट्र के संतों की पारंपरिक शिक्षाओं को कमजोर करने के लिए भेजा गया है। उन्होंने आध्यात्मिक हस्तियों पर छत्रपति शिवाजी महाराज और गौतम बुद्ध जैसे पूजनीय व्यक्तियों का अपमान करके समाज में सांप्रदायिक दरार पैदा करने का आरोप लगाया।

कीचड़ हमले के बाद, लावंडे लोनी कालभोर पुलिस थाने पहुंचे।

लावंडे ने बताया, ‘संग्राम भंडारे और 10-15 लोग, जो खुद को गौ रक्षक बता रहे थे, कई वाहनों में आए।’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘सुबह करीब 10 बजे, जब मैं प्रवचन से लौट रहा था, उन्होंने मेरी कार रोकी, मेरे साथ मारपीट की और भागने से पहले पिस्तौल दिखाई।’

लावंडे ने कहा कि जब तक पुणे पुलिस आयुक्त उन पर हमला करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करते, तब तक वह पुलिस थाने में ही रहेंगे।

भंडारे ने बाद में सोशल मीडिया पर कहा कि स्याही वाली घटना ‘वारकरी आंदोलन’ के हिंदू आध्यात्मिक नेताओं के खिलाफ लावंडे के ‘बेबुनियाद आरोपों’ के विरोध में की गई थी। उन्होंने पिस्तौल के इस्तेमाल के दावे को ‘बेबुनियाद’ बताते हुए खारिज कर दिया।

राकांपा (शप) विधायक रोहित पवार ने घटना की निंदा करते हुए सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण वारकरी आंदोलन का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले लोग ‘अपमानजनक भाषा’ और ‘शारीरिक बल’ का प्रयोग क्यों करेंगे।

उन्होंने पूछा कि जब बागेश्वर धाम सरकार जैसे आध्यात्मिक गुरुओं ने कथित तौर पर नागपुर में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी, तब ‘हमलावर’ चुप क्यों रहे?

उनकी पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने एक पत्रिका लेख में चिंता व्यक्त की थी कि हाल के दिनों में वारकरी परंपरा में प्रतिगामी तत्व प्रवेश कर चुके हैं और इस संप्रदाय के कुछ उपदेशकों के प्रवचन धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा दे रहे हैं।

हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा कि लेख पूरी तरह गलत है और परंपरा की समझ की कमी दर्शाता है।

‘वारकरी’ शब्द पंढरपुर के भगवान विट्ठल के उन भक्तों के लिए प्रयोग किया जाता है जो प्रतिवर्ष पैदल चलकर मंदिर की तीर्थयात्रा करते हैं। यह परंपरा कई सदियों पुरानी है।

भाषा

राखी संतोष

संतोष