मुंबई, 10 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र विधान परिषद की विशेषाधिकार समिति ने अध्यक्ष राम शिंदे के खिलाफ कथित तौर पर ‘अपमानजनक और अपशब्दों’ से भरी भाषा का प्रयोग करने के आरोप में मंगलवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) कार्यकर्ता के लिए 30 दिनों के दीवानी कारावास की सिफारिश की।
परिषद में समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए समिति के अध्यक्ष व भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड ने कहा कि समिति ने इस घटना को विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की गरिमा का अपमान माना है।
लाड ने सदन में कहा, ‘राकांपा (शरदचंद्र पवार) कार्यकर्ता सूर्यकांत मोरे द्वारा अध्यक्ष राम शिंदे के खिलाफ इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा की गंभीरता को देखते हुए यह घटना एक दुर्लभ मामला मानी जाती है। हम मोरे के लिए 30 दिन के दीवानी कारावास की सिफारिश करते हैं।’
हालांकि, उन्होंने कहा कि परिषद की कार्यवाही अगले सत्र तक स्थगित होने के बाद तकनीकी रूप से यह सजा समाप्त हो जाएगी।
लाड ने कहा, ‘परिषद का कामकाज अगले सत्र तक स्थगित होने पर ऐसी सजा निरस्त हो जाती है। ऐसे में सत्र समाप्त होते ही मोरे जेल से बाहर आ जाएंगे। इसलिए समिति सिफारिश करती है कि कारावास के शेष दिन विधान परिषद के अगले सत्र के दौरान पूरे किए जाएं।’
राज्य विधान परिषद का सत्र 25 मार्च को समाप्त होगा।
भाजपा नेता ने कहा कि संवैधानिक अधिकारियों को निशाना बनाकर अपशब्दों का प्रयोग करने के खिलाफ कड़ा संदेश देने के लिए यह सख्त कार्रवाई आवश्यक थी।
उन्होंने कहा, ‘इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों को कड़ा संदेश देने के लिए सूर्यकांत मोरे के खिलाफ ऐसी कार्रवाई आवश्यक है। मोरे ने न केवल परिषद के वर्तमान अध्यक्ष का अपमान किया है, बल्कि उच्च सदन के सभी पूर्व सदस्यों का भी अपमान किया है।’
यह विवाद नवंबर 2024 का है जब कर्जत-जामखेड़ विधानसभा क्षेत्र में एक विवाद के दौरान मोरे ने कथित तौर पर शिंदे के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। विधानसभा चुनाव में इस सीट से शिंदे को राकांपा (शरदचंद्र पवार) विधायक रोहित पवार ने हराया था।
इन टिप्पणियों के बाद, विधानमंडल की विशेषाधिकार समिति के समक्ष मोरे के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया गया।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश