भारत के लिए ओमान के साथ व्यापार समझौता रणनीतिक, होर्मुज जोखिम से राहत: जीटीआरआई

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भारत के लिए ओमान के साथ व्यापार समझौता रणनीतिक, होर्मुज जोखिम से राहत: जीटीआरआई

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 11:35 AM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 11:35 AM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) भारत के लिए ओमान के साथ व्यापार समझौता रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मस्कट का अधिकतर तट होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है। इससे क्षेत्रीय संघर्ष, व्यवधान या भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौरान भी ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद व्यापार और ऊर्जा मार्ग बना रह सकता है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने सोमवार को यह बात कही।

‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) के अनुसार, इस दृष्टि से यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा में निवेश भी है।

भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर पिछले वर्ष दिसंबर में हस्ताक्षर किए गए थे जो एक जून से लागू हो गया है।

जीटीआरआई के अनुसार, ओमान की आबादी लगभग 55 लाख है और उसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) करीब 110 अरब डॉलर है। इसलिए भारत को व्यापारिक लाभ सीमित रह सकते हैं। हालांकि, इस समझौते का महत्व ओमान की भौगोलिक स्थिति में निहित है।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, “ होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते समुद्री परिवहन पर निर्भर अधिकतर खाड़ी देशों के विपरीत ओमान का बड़ा तटीय क्षेत्र इस जलडमरूमध्य के बाहर, सीधे अरब सागर और ओमान की खाड़ी पर स्थित है। इससे सलालाह बंदरगाह और दुक्म बंदरगाह जैसे प्रमुख बंदरगाह जलडमरूमध्य में व्यवधान के बावजूद सुलभ रहते हैं।’’

उन्होंने कहा कि इसी कारण खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष या अस्थिरता के समय भी ओमान एक भरोसेमंद व्यापार और ऊर्जा मार्ग बना रह सकता है।

आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख खाड़ी देशों से भारत का आयात अप्रैल 2025 के लगभग 15 अरब डॉलर से घटकर अप्रैल 2026 में 9.8 अरब डॉलर रह गया, जबकि इस क्षेत्र को भारत का निर्यात 4.4 अरब डॉलर से घटकर 2.7 अरब डॉलर हो गया।

इसके विपरीत, ओमान एक अपवाद रहा। ओमान से भारत का आयात 246.4 प्रतिशत बढ़कर 43 करोड़ डॉलर से लगभग 1.5 अरब डॉलर हो गया, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल और यूरिया की अधिक खरीद रही। वहीं, ओमान को भारत का निर्यात केवल 10.3 प्रतिशत ही घटा।

जीटीआरआई ने कहा कि यह दर्शाता है कि जब होर्मुज जलडमरूमध्य जोखिमपूर्ण या भीड़भाड़ वाला हो जाता है, तब ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद वैकल्पिक व्यापार एवं ऊर्जा मार्ग की भूमिका निभा सकता है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। यह मार्ग वैश्विक दैनिक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत और समुद्री तेल व्यापार का 25 प्रतिशत संभालता है, जिससे यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग बन जाता है।

इस संघर्ष के कारण सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत को तेल एवं गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा