अमरावती में पारा 46.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा; विदर्भ के कई हिस्सों के लिए ‘भीषण लू’ का अलर्ट

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अमरावती में पारा 46.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा; विदर्भ के कई हिस्सों के लिए ‘भीषण लू’ का अलर्ट

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  • Publish Date - May 19, 2026 / 09:14 PM IST,
    Updated On - May 19, 2026 / 09:14 PM IST

नागपुर, 19 मई (भाषा) महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र भीषण लू की चपेट में है, जहां मंगलवार को अमरावती में पारा 46.8 डिग्री सेल्सियस और वर्धा में 46.5 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। क्षेत्र के अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है।

विदर्भ क्षेत्र को फिलहाल भीषण गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं हैं, क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले दो-तीन दिन के लिए कई जिलों में भीषण लू की स्थिति को लेकर ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।

अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को अमरावती 46.8 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ क्षेत्र का सबसे गर्म शहर रहा, जबकि वर्धा में अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस, अकोला में 46 डिग्री सेल्सियस, नागपुर में 45.5 डिग्री सेल्सियस, यवतमाल में 45.4 डिग्री सेल्सियस, चंद्रपुर में 45.2 डिग्री सेल्सियस, गढ़चिरौली में 44 डिग्री सेल्सियस, गोंदिया में 43.8 डिग्री सेल्सियस, वाशिम में 43.5 डिग्री सेल्सियस और भंडारा में 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

इससे पहले सोमवार को वर्धा 46.5 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ क्षेत्र का सबसे गर्म शहर था।

मौसम विभाग ने 19 मई को अकोला, अमरावती, वर्धा और यवतमाल के लिए, जबकि 20-21 मई को अकोला, अमरावती और वर्धा के लिए भीषण लू का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।

आईएमडी के नागपुर केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “नागपुर सहित विदर्भ के कई हिस्सों में पिछले सात-आठ दिन से लू की स्थिति बनी हुई है। आने वाले कुछ दिनों में नागपुर, वर्धा, अकोला, अमरावती और यवतमाल सहित विदर्भ के अधिकांश हिस्सों में गर्मी से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है।”

कुमार ने कहा, “पहले लू का दौर कम समय के लिए होता था और कुछ दिनों बाद राहत मिल जाती थी। हालांकि, इस साल तापमान लगातार 45 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जो बेहद चिंताजनक है। मौसम विभाग ने ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।”

उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी न केवल मानव स्वास्थ्य, बल्कि पशुधन और जलीय जीवों को भी प्रभावित करती है और इससे भूजल के स्तर पर भी असर पड़ता है।

भाषा सुमित पारुल

पारुल