पुणे (महाराष्ट्र), 22 मार्च (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में ‘स्वस्थ भारत’ भी शामिल होना चाहिए।
उन्होंने नागरिकों से संतुलित पोषण लेने, नियमित शारीरिक गतिविधियां करने और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।
पुणे में महात्मा गांधी द्वारा परिकल्पित निसर्गोपचार आश्रम के 81वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए, राधाकृष्णन ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य केवल बीमारी से मुक्त होना नहीं है, बल्कि पूर्ण शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण की स्थिति है।
उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘विकसित भारत की परिकल्पना में ‘स्वस्थ भारत’ भी शामिल होना चाहिए, जिसमें निसर्गोपचार आश्रम जैसे संस्थान इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लोगों को संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि, मानसिक स्वास्थ्य और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनानी चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि आश्रम की परिकल्पना करने वाले महात्मा गांधी और इस नेक कार्य के लिए भूमि दान करने वाले किसान के प्रति राष्ट्र कृतज्ञ है।
राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘गांधीजी प्रकृति को सबसे बड़ा उपचारक मानते थे और इस बात पर जोर देते थे कि सच्चा स्वास्थ्य सादगी, अनुशासन और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहने में निहित है।’’
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने आश्रम के प्रबंध न्यासी डॉ. नारायण हेगड़े द्वारा लिखित पुस्तक ‘सीक्रेट्स ऑफ आवर हैप्पीनेस’ का विमोचन भी किया।
महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।
भाषा शफीक दिलीप
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