दीपक को रजत, फाइनल में दौलतबेकोव से हारे

Ads

दीपक को रजत, फाइनल में दौलतबेकोव से हारे

  •  
  • Publish Date - April 24, 2022 / 06:36 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:15 PM IST

उलानबटोर (मंगोलिया), 24 अप्रैल (भाषा) दीपक पूनिया कजाखस्तान के अजमत दौलतबेकोव के मजबूत डिफेंस से पार पाने में नाकाम रहे और उन्हें रविवार को यहां एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप के अंतिम दिन रजत पदक से संतोष करना पड़ा जबकि विकी चाहर ने फ्रीस्टाइल 92 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता।

महाद्वीपीय प्रतियोगिता में पहले स्वर्ण पदक के लिए चुनौती पेश कर रहे दीपक (86 किग्रा, फ्रीस्टाइल) ने बिना कोई अंक गंवाए फाइनल में जगह बनाई थी। उन्होंने पहले ईरान के मोहसेन मीरयूसुफ मोस्ताफी अलानजाग (6-0) और फिर कोरिया के गुवानुक किम (5-0) को हराया।

दौलतबेकोव ने दीपक को आक्रामक खेल नहीं दिखाने दिया और उनके हमलों को आसानी से नाकाम किया।

दीपक आम तौर पर अपने गति और चपलता से विरोधियों को पछाड़ते हैं लेकिन दौलतबेकोव ने भारतीय पहलवान के पैर पर किए हमलों को नाकाम किया और उनसे जरूरी दूरी बनाए रखी।

दौलतबेकोव ने पलटवार करते हुए मौका बनाया और फिर बढ़त बनाने के बाद उसे बरकरार रखते हुए आसानी से 6-1 से जीत दर्ज की।

दीपक का एशियाई चैंपियनशिप में यह चौथा पदक है। वह इससे पहले एक रजत (2021) और दो कांस्य (2019 और 2020) पदक जीत चुके हैं।

भारत के लिए चाहर ने भी कांस्य पदक जीता उन्होंने उज्बेकिस्तान के अजिनियाज सपारनियाजोव को 5-3 से शिकस्त दी।

भारत ने इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में 17 पदक जीते। रवि दहिया एकमात्र स्वर्ण पदक विजेता रहे जिन्होंने पुरुष फ्रीस्टाइल 57 किग्रा वर्ग में सोने का तमगा जीता।

ग्रीको रोमन पहलवानों का पांच पदक जीतना उत्साहवर्धक रहा लेकिन दूसरे देशों के कई शीर्ष पहवानाओं की गैरमौजूदगी के बावजूद सिर्फ एक स्वर्ण पदक जीत पाना अच्छा संकेत नहीं है।

इस बीच मंगल कादयान पोडियम पर जगह नहीं बना सके। उन्हें 61 किग्रा वर्ग के कांस्य पदक के मुकाबले में किर्गिस्तान के के उलुकबेक झोलदोशबेकोव के खिलाफ 4-6 से हार का सामना करना पड़ा।

यश तुनीर हालांकि 74 किग्रा वर्ग के क्वालीफिकेशन दौर के मुकाबले में उज्बेकिस्तान के इख्तियोर नवरुजोव के खिलाफ 10-11 के करीबी अंतर से हार गए।

अनिरुद्ध कुमार को 125 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में कोरिया के येईह्युन जुंग के खिलाफ 4-8 से शिकस्त झेलनी पड़ी।

भाषा  सुधीर आनन्द

आनन्द