(मोना पार्थसारथी)
नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) जूनियर विश्व कप 2016 जीतने के बाद ट्रॉफी के साथ सोते हुए कप्तान हरजीत सिंह की तस्वीरें जब वायरल हुई तो उन्हें भारतीय हॉकी का अगला ‘सुपरस्टार’ कहा जाने लगा लेकिन फिर अचानक उनका नेपथ्य में चले जाना हॉकीप्रेमियों के लिये ही नही, ख्रुद उनके लिये भी हैरानी का सबब रहा ।
हॉकी इंडिया लीग में जेएसडब्ल्यू सूरमा के लिये खेल रहे हरजीत ने भाषा से खास बातचीत में कहा ,‘‘ हर खिलाड़ी का सपना होता है कि जूनियर के बाद सीनियर टीम से जुड़े और ओलंपिक खेले । लेकिन अचानक जो कुछ हुआ, मुझे समझ ही नहीं आया कि क्या करूं ।’’
न्यूजीलैंड के खिलाफ 2018 में आखिरी बार भारत के लिये खेलने वाले हरजीत की कप्तानी में भारतीय जूनियर टीम ने लखनऊ में 2016 विश्व कप में अपराजित रहकर पंद्रह साल बाद खिताब जीता था । हर अखबार में और सोशल मीडिया पर हरजीत की ट्रॉफी के साथ सोते हुए तस्वीर सुर्खियों में थी । उनकी कामयाबी पर पंजाबी में ‘हरजीता’ फिल्म भी बनी ।
हरजीत 2016 में लंदन में चैम्पियंस ट्रॉफी में रजत पदक जीतने वाली सीनियर टीम और 2015 जूनियर एशिया कप स्वर्ण जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थे।
जूनियर विश्व कप 2016 की टीम से भारत के मौजूदा कप्तान हरमनप्रीत सिंह, फॉरवर्ड मनदीप सिंह, गोलकीपर कृशन पाठक जैसे कई खिलाड़ी निकले जो सीनियर स्तर पर कामयाब रहे ।
हरजीत ने कहा ,‘‘ मेरे साथ के सभी खिलाड़ी आज अच्छा खेल रहे हैं और मुझे भी कसक महसूस होती है।’’
29 वर्ष के इस मिडफील्डर को बखूबी पता है कि राष्ट्रीय टीम में वापसी की राह अब मुश्किल है लेकिन अपने प्रदर्शन के दम पर वह यह साबित करना चाहते हैं कि उन्हें बाहर करने का फैसला गलत था ।
भारत के लिये करीब 50 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके इस खिलाड़ी ने कहा ,‘‘मुझे आज तक यह सवाल चुभता है कि 2019 में राष्ट्रीय शिविर में वापसी के बाद दो ढाई साल तक सीनियर टीम के साथ रहने के बाद मुझे बाहर क्यों किया गया । मैने कइयों से पूछा लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘हॉकी इंडिया लीग में अच्छे प्रदर्शन से राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का दावा मजबूत कर सकते हैं लेकिन मुझे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके दिखाना है कि मुझे बाहर करने का फैसला गलत था ।मुझसे आखिर क्या ऐसी गलती हुई थी जिसकी इतनी बड़ी सजा मिली ।’’
उनकी तुलना अक्सर जूनियर विश्व कप विजेता क्रिकेट कप्तान उन्मुक्त चंद से की जाती है जो जूनियर स्तर की सफलता को सीनियर टीम के साथ दोहरा नहीं सके और अचानक परिदृश्य से गायब हो गए ।
भारत पेट्रोलियम के लिये विभागीय हॉकी खेलने के अलावा हरजीत ने नीदरलैंड में डच लीग में एचजीसी और ब्रिटेन में इंडियन जिमखाना के लिये खेला ।
पंजाब के मोहाली के कुराली गांव से निकले इस खिलाड़ी ने कहा ,‘‘ मैं काफी समय इन चीजों से बाहर नहीं निकल सका । पिंड गया तो वहां भी सभी पूछते थे कि वापिस कब खेलेगा तो मेरा वहां भी रहने का मन नहीं करता था ।धीरे धीरे मैने विभागीय हॉकी और दूसरे देशों में लीग खेलनी शुरू की ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ यह मेरे जीवन का सबसे कठिन दौर था मानो सभी के पास मेरे लिये एक ही सवाल था कि मैं कब दोबारा भारत के लिये खेलूंगा । मैं अपनी ओर से पॉजीटिव रहने की पूरी कोशिश करता था । खेलों की बायोपिक देखकर प्रेरणा लेता था।’’
हॉकी इंडिया लीग में हरमनप्रीत की कप्तानी वाली जेएसडब्ल्यू सूरमा टीम के लिये खेल रहे हरजीत ने कहा ,‘‘ मैं दिल से सूरमा (योद्धा ) हूं और टीम का काफी सहयोग मिला है चूंकि इसमें जूनियर सीनियर का कोई भेद नहीं है ।’’
उन्होंने कहा,‘‘ जूनियर विश्व कप के साथी हरमनप्रीत , आकाशदीप, गुरजंत, विवेक सागर प्रसाद टीम में हैं जो अच्छी बात है । हरमनप्रीत टीम को साथ में लेकर चलता है और ड्रेसिंग रूम का माहौल काफी अच्छा रहता है ।’’
हॉकी किट और अच्छी खुराक के लालच में खेलना शुरू करने वाले हरजीत 2007 में जालंधर की सुरजीत अकादमी चले गए और 2011 में भारतीय टीम के शिविर में चयन हुआ था ।
भाषा
मोना सुधीर
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