जम्मू कश्मीर ने 67 साल का इंतजार खत्म करके पहली बार जीता रणजी ट्रॉफी का खिताब

Ads

जम्मू कश्मीर ने 67 साल का इंतजार खत्म करके पहली बार जीता रणजी ट्रॉफी का खिताब

  •  
  • Publish Date - February 28, 2026 / 03:10 PM IST,
    Updated On - February 28, 2026 / 03:10 PM IST

(जी उन्नीकृष्णन)

हुबली, 28 फरवरी (भाषा) जम्मू कश्मीर ने अपने जोश और जज्बे का शानदार नमूना पेश करते हुए शनिवार को यहां कर्नाटक के खिलाफ ड्रॉ रहे फाइनल में पहली पारी की बढ़त के आधार पर पहली बार रणजी ट्रॉफी क्रिकेट टूर्नामेंट का खिताब जीतकर 67 साल का इंतजार खत्म किया और अपना नाम इतिहास में दर्ज कर दिया।

जम्मू कश्मीर ने यह शानदार जीत आठ बार के चैंपियन कर्नाटक के खिलाफ दर्ज की। उसने पांच दिन तक चले मुकाबले में शुरू से ही अपना दबदबा बनाए रखा और इस सत्र में अपने अभियान का शानदार अंत किया।

जम्मू कश्मीर ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अपनी पहली पारी में 584 रन बनाए थे जिसके जवाब में कर्नाटक की टीम 293 रन ही बना पाई थी। इस तरह से जम्मू कश्मीर को 291 रन की बढ़त मिली और उसने कर्नाटक को फॉलोआन के लिए आमंत्रित करने की बजाय दूसरी पारी खेलने का फैसला किया।

मैच के पांचवें और अंतिम दिन जम्मू कश्मीर ने जब अपनी दूसरी पारी में चार विकेट पर 342 रन बनाए थे तब दोनों टीम के कप्तान मैच को ड्रॉ करने पर सहमत हो गए और जम्मू कश्मीर पहली बार चैंपियन बन गया। इस तरह से जम्मू कश्मीर में अपनी कुल बढ़त 633 रन कर दी थी।

जम्मू कश्मीर ने सुबह अपनी दूसरी पारी चार विकेट पर 186 रन से आगे बढ़ाई। कामरान इकबाल और साहिल लोत्रा ने कर्नाटक को एक भी सफलता हासिल नहीं करने दी और नाबाद शतक लगाए। इससे जम्मू कश्मीर के दबदबे का पता चलता है।

जब मैच ड्रॉ करने पर सहमति बनी उस समय सुबह अपनी पारी 94 रन से आगे बढ़ाने वाले इकबाल 160 और लोत्रा 101 रन पर खेल रहे थे। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना पहला शतक लगाने वाले लोत्रा ने सुबह अपनी पारी 16 रन से आगे बढ़ाई थी।

रणजी ट्रॉफी का इतिहास 92 साल पुराना है लेकिन जम्मू कश्मीर की टीम ने 67 साल पहले पहली बार इस राष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। एक समय उसे कमजोर टीम माना जाता था लेकिन अब उसने अपने कौशल और दृढ़ संकल्प से खुद को मजबूत टीम साबित कर दिया।

जम्मू-कश्मीर 2013-14, 2019-20 और 2024-25 के सत्र में क्वार्टर फाइनल में पहुंचा था, लेकिन लेकिन वह इससे आगे बढ़ने में नाकाम रहा था।

लेकिन केएससीए स्टेडियम में पिछले पांच दिनों में किसी भी समय ऐसा नहीं लगा कि उसके खिलाड़ी पहली बार रणजी ट्रॉफी का फाइनल खेल रहे हैं। उसकी यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने उस टीम को हराया जिसके पास कई स्टार भारतीय खिलाड़ी हैं।

यह सही मायने में एक टीम प्रयास था जिसने कमज़ोर मानी जाने वाली टीम को खिताब तक पहुंचाया।

तेज गेंदबाज आकिब नबी फाइनल में भी उतने ही प्रभावशाली रहे जितने कि वे इस पूरे सत्र में रहे थे। उन्होंने इस सत्र में सात बार पारी में पांच या इससे अधिक विकेट लिए।

फाइनल में लोत्रा ​​ने एक अर्धशतक और एक शतक बनाया, कप्तान पारस डोगरा रणजी ट्रॉफी में 10,000 रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बने, जबकि यावर हसन, अब्दुल समद और कन्हैया वधवान ने अर्धशतक बनाये।

जम्मू कश्मीर की इस सत्र की शुरुआत श्रीनगर में मुंबई से हार के साथ शुरू हुई थी लेकिन इसके बाद हर अगले मैच में उसके प्रदर्शन में सुधार होता गया। उसने कल्याणी में खेले गए सेमीफाइनल में बंगाल को हराकर पहली बार फाइनल में जगह बनाई थी।

इस मैच में बंगाल ने पहली पारी में बढ़त हासिल की थी लेकिन जम्मू कश्मीर में उसे इसका फायदा नहीं उठाने दिया। फाइनल में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने के बाद उसका लक्ष्य बड़ा स्कोर बनाना था जिससे कि वह पहली पारी में बढ़त हासिल कर सके और वह इसमें सफल भी रहा।

फाइनल में शुभम पुंडीर ने शानदार शतक बनाया, जिससे जम्मू कश्मीर में बड़े स्कोर की नींव रखी। उसने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। कर्नाटक को पूरा विश्वास था कि वह अपना नौवां रणजी खिताब जीतने में सफल रहेगा लेकिन जम्मू कश्मीर ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

मैच के पांचवें और अंतिम दिन जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी अपनी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए स्टेडियम में मौजूद थे।

भाषा

पंत नमिता

नमिता