साक्षी, लवलीना और जादुमणि ने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में अपना कोटा पक्का किया

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साक्षी, लवलीना और जादुमणि ने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में अपना कोटा पक्का किया

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  • Publish Date - May 15, 2026 / 06:23 PM IST,
    Updated On - May 15, 2026 / 06:23 PM IST

… अपराजिता उपाध्याय …

पटियाला, 15 मई (भाषा) ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन, दिग्गज खिलाड़ियों को शिकस्त देने वाली साक्षी चौधरी, जादूमणि सिंह और नरेंद्र बेरवाल ने शुक्रवार को यहां चयन ट्रायल के अंतिम दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के लिए अपनी जगह पक्की की। कड़ी प्रतिस्पर्धा और वजन वर्गों में फेरबदल के बीच इन मुक्केबाजों ने कोटा हासिल किया। ट्रायल के दौरान कई मुक्केबाजों ने सीमित वजन वर्गों में जगह बनाने के लिए अपना वर्ग बदला। इनके साथ विश्व चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता परवीन हुड्डा (65 किग्रा), सुमित कुंडू (70 किग्रा), अंकुश (80 किग्रा) और कपिल पोखरिया (90 किग्रा) भी ग्लासगो और जापान जाने वाली टीम में शामिल होंगे। इन सभी ने अपने-अपने फाइनल मुकाबले जीतकर स्थान सुनिश्चित किया। मौजूदा राष्ट्रीय चैंपियन आदित्य प्रताप सिंह (65 किग्रा) ने हालांकि केवल जुलाई-अगस्त में ग्लासगो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए ही क्वालीफाई किया। एशियाई खेल सितंबर-अक्टूबर में जापान के आइची-नागोया में आयोजित होंगे। दिन के सबसे चर्चित मुकाबले में दो बार की युवा विश्व चैंपियन साक्षी ने एक और शानदार प्रदर्शन करते हुए मौजूदा 48 किग्रा विश्व चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा को 5-0 से हराकर 51 किग्रा वर्ग में स्थान हासिल किया। लगातार दूसरे दिन साक्षी ने किसी विश्व चैंपियन को हराया। बृहस्पतिवार को उन्होंने दो बार की विश्व स्वर्ण पदक विजेता निकहत जरीन को मात दी थी। इस जीत के साथ साक्षी ने शानदार वापसी की कहानी पूरी की। मुक्केबाजी संघ की अब समाप्त हो चुकी मूल्यांकन प्रणाली के तहत वह एशियाई चैंपियनशिप के लिए चयनित नहीं हो सकी थीं। प्रीति पवार पहले ही एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर 54 किग्रा का कोटा हासिल कर चुकी थीं, इसलिए साक्षी ने एक वर्ग नीचे उतरने का फैसला किया और यह उनके लिए बेहद सफल साबित हुआ। मीनाक्षी को भी 48 किग्रा वर्ग छोड़कर ऊपर आना पड़ा, क्योंकि उनका मूल वर्ग इन दोनों बहु-खेल आयोजनों में शामिल नहीं है। साक्षी ने मुकाबले के बाद ‘पीटीआई’ से कहा, “मेरा लक्ष्य किसी भी तरह कोटा हासिल करना था। मैंने अपना वजन 55 किग्रा से कम किया, जो मेरे लिए बड़ी चुनौती थी। लेकिन वजन कम करने से मेरी इच्छाशक्ति और मजबूत हुई। मेरे लिए यह करो या मरो की स्थिति थी।” उन्होंने कहा, “मैंने तीनों मुकाबलों में अपने खेल पर ध्यान दिया। निकहत को हराना मुश्किल नहीं था। मैंने दूरी बनाए रखी और अपने बाएं मुक्के का प्रभावी इस्तेमाल किया। मैं पहले भी 52 किग्रा में मीनाक्षी को हरा चुकी थी, इसलिए मुझे भरोसा था कि मैं फिर ऐसा कर सकती हूं।” पूर्व विश्व चैंपियन लवलीना ने भारतीय महिला मुक्केबाजी में अपना दबदबा कायम रखते हुए 75 किग्रा फाइनल में सनामाचा चानू को 5-0 से हराया। आक्रामक अंदाज के लिए मशहूर जादूमणि ने 55 किग्रा फाइनल में निखिल को 5-0 से शिकस्त दी। परवीन को हालांकि कड़ी मेहनत करनी पड़ी। प्रिया घंघास के मंगोलिया में एशियाई चैंपियनशिप जीतकर 60 किग्रा का कोटा हासिल करने के बाद परवीन को 65 किग्रा वर्ग में जाना पड़ा, जहां उन्होंने हरियाणा की मुक्केबाज स्नेह को 3-2 से हराया। वजन वर्ग बदलने का फायदा उठाने वालों में सुमित भी शामिल रहे। 75 किग्रा से नीचे उतरकर उन्होंने दीपक को हराते हुए 70 किग्रा का कोटा हासिल किया। उन्होंने इससे पहले बृहस्पतिवार को विश्व कप स्वर्ण पदक विजेता हितेश गुलिया को सेमीफाइनल में हराया था। युवा मुक्केबाज अंकुश ने 80 किग्रा मुकाबले में सेना के अपने साथी मालसावमतलुआंगा को हराकर पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई किया। पिछले एशियाई खेलों में भारत के एकमात्र पुरुष पदक विजेता नरेंद्र ने 90 किग्रा से अधिक भार वर्ग के फाइनल में सावन को हराकर अपने अनुभव का शानदार प्रदर्शन किया। सचिन सिवाच (60 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा) और प्रिया घंघास (60 किग्रा) पहले ही एशियाई चैंपियनशिप के प्रदर्शन के आधार पर दोनों प्रतियोगिताओं के लिए क्वालीफाई कर चुके थे। वहीं मौजूदा विश्व चैंपियन जैस्मिन लम्बोरिया (57 किग्रा) और अरुंधति चौधरी (70 किग्रा) ने केवल राष्ट्रमंडल खेलों के लिए जगह बनाई। इस ट्रायल का आयोजन प्रशासनिक विवादों के बीच हुआ। भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा भारतीय मुक्केबाजी महासंघ की विवादास्पद मूल्यांकन-आधारित चयन प्रक्रिया को बीच में ही निलंबित किए जाने के बाद महासंघ को पारंपरिक ट्रायल प्रणाली अपनानी पड़ी। टीम : महिला: साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), जैस्मिन लम्बोरिया (57 किग्रा, केवल राष्ट्रमंडल खेल), प्रिया घंघास (60 किग्रा), परवीन हुड्डा (65 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा, केवल राष्ट्रमंडल खेल), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा)। पुरुष: जादूमणि सिंह (55 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), आदित्य प्रताप सिंह (65 किग्रा, केवल राष्ट्रमंडल खेल), सुमित कुंडू (70 किग्रा), अंकुश (80 किग्रा), कपिल पोखरिया (90 किग्रा), नरेंद्र बेरवाल (90 किग्रा से अधिक)। भाषा आनन्द नमितानमिता