रायपुर। राजधानी रायपुर में बरामद 5 करोड़ रुपये के नकली नोट मामले ने देश की सेंट्रल जांच एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिये हैं। NIA ने रायपुर सेंट्रल क्राइम ब्रांच और छत्तीसगढ़ ATS से पूरे मामले की लिखित रिपोर्ट तलब की है।
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पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक नकली नोट बनाना देशद्रोह के दायरे में आता है, इसलिये NIA ने पूरे मामले की लिखित रिपोर्ट मांगी है। NIA की एक टीम रायपुर आकर या दोनों आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर अपने साथ दिल्ली ले जाकर पूछताछ भी कर सकती है। इस मामले में अमलीडीह इलाके से गिरफ्तार दंपति निखिल कुमार सिंह और पूनम अग्रवाल ने पूछताछ में कई बड़े NGO और उनसे जुड़े लोगों के नाम बताये हैं। हालांकि पुलिस अभी नामों का खुलासा नहीं कर रही है। दंपति के मोबाइल कॉल डिटेल्स भी खंगाले जा रहे हैं।
गौरतलब है राजेंद्र नगर में निखिल के फ्लैट में पुलिस ने छापा मारकर 5 करोड़ के नकली नोट जब्त किए थे। नकली नोट छापने के आरोप में पुलिस ने निखिल और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपियों ने घर में ही रंगीन प्रिंटर, स्कैनर और लैपटॉप के माध्यम से पूरे नोट प्रिंट किए थे। 2-2 हजार रुपए के दो सीरियल नंबर के नोट को स्कैन करके प्रिंट दे देते थे। 5 करोड़ के पूरे नोट दो ही सीरियल नंबर 577386 और 650224 के हैं।
नोट छापने के लिए सामान्य फोटोकॉपी वाले कागज का उपयोग किया गया है। स्कैनिंग के जरिए हुबहू असली नोट की तरह प्रिंट निकाला गया है। दूर से देखने पर असली नोट जैसे लगता है। छूने पर ही असली नोट से अलग लगता है। इसके अलावा इसमें सिल्वर पट्टी भी नहीं है। इस कारण यह नकली प्रतीत होता है।
निखिल दिल्ली के बाद रायगढ़ में काफी समय तक रहा है। इसके बाद रायपुर आ गया। बताया जाता है कि वह करीब पांच साल से रायपुर में रह रहा है। उसने सीएसआर के माध्यम से ठगी करने की कोशिश की और इसके लिए धमतरी के एनजीओ का इस्तेमाल क्यों किया? इसको लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। रायपुर, रायगढ़ या बिलासपुर से जुड़े कई एनजीओ हैं। इसके बावजूद उसने धमतरी के एनजीओ का इस्तेमाल किया है। पुलिस निखिल और उसकी पत्नी के अलावा उनसे जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी खंगाल रही है।