Ram Shila Controversy: आखिर कहां गईं श्रद्धालुओं की अमूल्य भेंट? दशकों पुरानी शिलाओं को लेकर उठे सवाल, संत ने लगाए गंभीर आरोप

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Ram Shila Controversy: आखिर कहां गईं श्रद्धालुओं की अमूल्य भेंट? दशकों पुरानी शिलाओं को लेकर उठे सवाल, संत ने लगाए गंभीर आरोप

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  • Publish Date - June 16, 2026 / 10:21 AM IST,
    Updated On - June 16, 2026 / 10:22 AM IST

Ram Shila Controversy | Photo Credit: AI

HIGHLIGHTS
  • 1250 शिलाएं गायब
  • चंपत राय पर आरोप
  • रामशिला अभियान, पूरे देश से दान और पूजित शिलाएं लाई गई थीं

अयोध्या: Ram Shila Controversy अयोध्या के राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं द्वारा भेंट की गईं करीब 1250 श्रीराम शिलाओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे का दावा है कि 1989 में गांव-गांव, शहर-शहर और देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आईं सोने-चांदी, हीरे-माणिक्य और अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब ‘गायब’ हो चुकी हैं।

Ram Shila Controversy संस्थापक संतोष दुबे के मुताबिक सोने-चांदी की शिलाओं की देख-रेख का जिम्मा भी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास था। संतोष दुबे वर्ष 1989 में इन शिलाओं की गणना करते थे। बाबरी तोड़ने के वक्त मलबे में दब गए थे। इसमें इनकी कई हड्डियां टूट गई थीं। लंबे वक्त तक VHP से जुड़े रहे। ये शिलाएं कारसेवकपुरम में जहां सुरक्षित रखी गई थीं, वहां 3 ताले लगे थे। फिर ये शिलाएं कहां गायब हो गईं, यह किसी को नहीं पता है।

संतोष दुबे ने बताया कि श्रीराम मंदिर के लिए 1985 में ‘श्रीराम जन्मभूमि न्यास’ बना। इसके अध्यक्ष परमहंस रामचंद्र दास थे। न्यास में विहिप के अशोक सिंघल, गिरिराज, रामविलास वेदांती, चंपत राय समेत कई लोग थे।

श्रीराम मंदिर आंदोलन को धार देने के लिए 1989 में विहिप ने पहला बड़ा अभियान शुरू किया। नारा दिया गया- ‘सवा रुपया दे दे रे भैया रामशिला के नाम का, राम के घर में लग जाएगा पत्थर तेरे नाम का।’

इस अभियान में विहिप ने हर एक व्यक्ति से सवा रुपए, मतलब एक घर से 5 से 10 रुपए चंदा देने के लिए कहा। साथ ही घर-घर से पूजित शिलाएं भी मांगीं। विहिप ने कहा था कि श्रीराम मंदिर के निर्माण में इन शिलाओं का इस्तेमाल किया जाएगा। इस अभियान ने पूरे देश में श्रीराम मंदिर के आंदोलन को तेज कर दिया। लोगों ने खुलकर दान दिया।’

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रामशिला अभियान कब शुरू हुआ था?

1989 में विहिप ने इसे शुरू किया था।

कितनी शिलाएं लाई गई थीं?

करीब 1250 शिलाएं देश-विदेश से आई थीं।

शिलाओं की देखरेख किसके पास थी?

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास।

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