लखनऊ, 24 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा है कि अस्पताल परिसरों की सीसीटीवी फुटेज तभी उपलब्ध कराई जा सकती है, जब वह किसी अदालती आदेश या पुलिस जांच का हिस्सा हो।
राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की पीठ ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग पर यह व्यवस्था दी।
अपने आदेश में सूचना आयुक्त ने कहा, “जब तक अस्पताल परिसर की सीसीटीवी फुटेज किसी पुलिस जांच या न्यायालय के आदेश का हिस्सा न हो, तब तक उसे किसी भी व्यक्ति को उसकी मांग पर उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।”
बिजनौर जिले के एक अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज की मांग से जुड़ी कुलवंत सिंह की अपील पर सुनवाई करते हुए आयोग ने कहा कि यदि फर्जी मेडिकल से संबंधित आरोप सत्य भी हों, तो उनके परीक्षण के लिए पुलिस जांच, सक्षम न्यायालय या विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई ही उपयुक्त मंच है।
सूचना का अधिकार अधिनियम को जांच या सुनवाई का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
सूचना आयुक्त ने कहा, “अस्पताल एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीज, उनके परिजन, चिकित्सक और स्टाफ का आवागमन रहता है।”
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मोहम्मद नदीम ने कहा, ‘‘सीसीटीवी फुटेज में केवल अपीलकर्ता ही नहीं, बल्कि कई अन्य मरीजों और व्यक्तियों की गतिविधियां भी रिकॉर्ड होती हैं। यह सभी की निजता से जुड़ा मामला है और जब तक कोई ठोस कारण या व्यापक लोकहित न हो, आरटीआई कानून किसी की निजता के उल्लंघन की अनुमति नहीं देता।’’
उन्होंने कहा, “हम किसी एक व्यक्ति को अपनी शिकायत को मजबूत करने के लिए सैकड़ों अन्य लोगों की निजता में दखल देने का अधिकार नहीं दे सकते।”
सूचना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि पुलिस जांच या न्यायालय के आदेश के अतिरिक्त किसी तीसरी स्थिति में फुटेज उपलब्ध कराने पर तभी विचार किया जा सकता है, जब उससे किसी अन्य व्यक्ति की निजता प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की शिकायतों को पुष्ट करने के लिए अस्पतालों की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भाषा आनन्द नेत्रपाल खारी
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