चर्चित आईएएस राही की पहल : स्कूली पोशाक पहनकर प्राथमिक विद्यालय पहुंचे बुजुर्ग ‘छात्र—छात्राएं’

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चर्चित आईएएस राही की पहल : स्कूली पोशाक पहनकर प्राथमिक विद्यालय पहुंचे बुजुर्ग 'छात्र—छात्राएं'

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  • Publish Date - May 19, 2026 / 10:26 PM IST,
    Updated On - May 19, 2026 / 10:26 PM IST

जालौन (उप्र), 19 मई (भाषा) जालौन के उपजिलाधिकारी चर्चित आईएएस अफसर रिंकू सिंह राही ने एक अनोखी पहल करते हुए 70 साल से अधिक उम्र के नौ इच्छुक बुजुर्ग लोगों को प्राथमिक विद्यालय तथा जूनियर हाई स्कूल में दाखिला दिलाया है।

स्कूल के अध्यापकों और छात्र—छात्राओं ने मंगलवार को विद्यालय पहुंचे इन बुजुर्ग ‘विद्यार्थियों’ का फूल माला पहनाकर स्वागत किया और बाकायदा स्कूली पोशाक पहनकर छोटे—छोटे बच्चों के बीच पढ़ने बैठे बुजुर्गों को देखना हर किसी के लिये कौतूहल का विषय था।

सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी ज्ञान प्रकाश अवस्थी ने बताया कि जालौन के उप जिलाधिकारी रिंकू सिंह राही के निर्देश पर आज सात बुजुर्ग पुरुषों और दो वृद्ध महिलाओं को छानी गांव में प्राथमिक एवं जूनियर हाई स्कूल में दाखिला दिलाया गया है।

उन्होंने बताया कि इनमें से देवी दीन (60), मिश्रीलाल (65), वंश गोपाल (72), भुलाई (70), किरण (60), टीकाराम (69) और राम मूर्ति (66) को प्राथमिक विद्यालय एवं कालका (78) तथा राजदुलैया (78) को छानी गांव के ही जूनियर हाई स्कूल में प्रवेश दिलाया गया है।

अवस्थी ने बताया कि बाकायदा स्कूली पोशाक पहनकर पहुंचे इन बुजुर्गों का विद्यालय के शिक्षकों और छात्र—छात्राओं ने माला पहनाकर और तालियां बजाकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद सभी बुजुर्ग छात्र—छात्राओं के साथ पढ़ने बैठे, जो आसपास के लोगों के लिये कौतूहल का विषय रहा।

बुजुर्ग लोगों को प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल में प्रवेश दिलाया जाना क्षेत्र में खासा चर्चा का विषय बना हुआ है।

यह पहल शुरू करने वाले आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही को पिछले साल शाहजहांपुर में वकीलों के सामने उठक—बैठक लगाने के बाद हटाकर राजस्व परिषद में तैनात कर दिया गया था लेकिन काम के बगैर वेतन लेने का हवाला देकर उन्होंने हाल ही में इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने त्यागपत्र वापस ले लिया था जिसके बाद उन्हें जालौन में उप जिलाधिकारी के पद पर तैनाती दी गयी थी।

उप जिलाधिकारी के पद पर तैनात होने के बाद ‘पीटीआई-भाषा’ ने उनका साक्षात्कार लेने की कोशिश की तो उन्होंने साफ मना कर दिया और कहा कि वह जनता की सेवा के लिए आये हैं और शासन द्वारा चलाई जा रही जनहित के कार्यक्रमों को पूरी तरह लागू करना, तहसील के कार्यों में पारदर्शिता लाना तथा अशिक्षित बुजुर्गों को शिक्षा दिलवाना उनकी प्राथमिकता होगी।

भाषा सं. सलीम राजकुमार

राजकुमार