ऐसा बाहुबली जो लव-सेक्स और मर्डर में गया जेल, गर्भवती के पेट में मरे बच्चे का DNA टेस्ट से खुला राज

बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी एक ऐसा नाम है जो इस समय पत्नी समेत जेल में है, एक घटना ने उसकी जिंदगी पलट दी। बेटा अमनमणि महाराजगंज जिले की नौतनवा सीट से चुनाव लड़ रहा है। ये सब कैसे हुआ कि 4 बार का विधायक, जो अलग-अलग सरकार में मंत्री रहा, ऐसा नेता राजनीतिक पार्टियों के लिए 'अछूत' बन गया?Such a Bahubali that went to jail for love-sex and murder, the secret of the child who died in the womb of the pregnant was revealed by DNA test

ऐसा बाहुबली जो लव-सेक्स और मर्डर में गया जेल, गर्भवती के पेट में मरे बच्चे का DNA टेस्ट से खुला राज

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Modified Date: November 29, 2022 / 08:01 pm IST
Published Date: March 5, 2022 2:51 pm IST

लखनऊ। बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी एक ऐसा नाम है जो इस समय पत्नी समेत जेल में है, एक घटना ने उसकी जिंदगी पलट दी। बेटा अमनमणि महाराजगंज जिले की नौतनवा सीट से चुनाव लड़ रहा है। ये सब कैसे हुआ कि 4 बार का विधायक, जो अलग-अलग सरकार में मंत्री रहा, ऐसा नेता राजनीतिक पार्टियों के लिए ‘अछूत’ बन गया?

दरअसल, 1970 के दशक में गोरखपुर में छात्र राजनीति में दो गुट थे। ब्राह्मणों के गुट का मसीहा हरिशंकर तिवारी और ठाकुरों के गुट का मसीहा वीरेंद्र प्रताप शाही था। दोनों गुटों में हर महीने फायरिंग होती। लोगों की मौत होती। वजह बस वर्चस्व स्थापित करना, ठेके हासिल करना था। उस वक्त सारे प्रभावशाली लोगों ने अपना एक पक्ष चुन लिया था। त‌ब अमरमणि त्रिपाठी सीन में आए और हरिशंकर तिवारी के खास बन गए।

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हरिशंकर तिवारी ने अमरमणि त्रिपाठी को 1980 में अपने दुश्मन वीरेंद्र प्रताप शाही के खिलाफ लक्ष्मीपुर सीट से चुनाव मैदान में उतारा। साल 2008 के परिसीमन के बाद से इस सीट का नाम नौतनवा है। अमरमणि को कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थन था, लेकिन वीरेंद्र को नहीं हरा सके। 1985 में अमरमणि फिर से चुनाव में उतरे, लेकिन नतीजा नहीं बदला। इस हार के बाद उन्होंने पार्टी बदल ली। कांग्रेस ज्वॉइन की। 1989 में इसका फायदा हुआ और अमरमणि पहली बार विधायक बन गए।

1991 और 1993 के विधानसभा चुनाव में अमरमणि को कुंवर अखिलेश प्रताप सिंह ने हरा दिया, लेकिन 1996 में स्थिति पलट गई। अमरमणि दूसरी बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत गए। प्रदेश में भाजपा-बसपा गठबंधन की सरकार बनी तो उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। भाजपा ने उन्हें न सिर्फ पार्टी में शामिल किया बल्कि मंत्रालय भी सौंप दिया।

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साल 2001, बस्ती जिले के एक बड़े कारोबारी के 15 साल के बेटे राहुल मदेसिया का अपहरण हो गया। मामला इतना हाई प्रोफाइल था कि लखनऊ से दिल्ली पहुंच गया। प्रदेश की भाजपा सरकार ने पुलिस को जल्द बच्चा खोज निकालने का आदेश दिया। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए राहुल को खोज निकाला। जांच हुई तो पता चला राहुल को अमरमणि त्रिपाठी के बंगले पर रखा गया था। BJP सरकार की बेइज्जती होने लगी तो उस वक्त के CM राजनाथ सिंह ने अमरमणि त्रिपाठी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया।

मधुमिता शुक्ला लखीमपुर जिले की कवयित्री थीं। मंचों पर वीर रस की कविताएं पढ़ती थीं। अमरमणि के संपर्क में आईं तो उनका नाम बड़ा हो गया। मंच से मिली शोहरत और सत्ता से नजदीकी ने उन्हें पावरफुल बना दिया। अमरमणि त्रिपाठी से उनका रिश्ता प्रेम में बदल गया। दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गए। मधुमिता प्रेग्नेंट हो गईं। उन पर गर्भपात करवाने का दबाव बढ़ा पर उन्होंने नहीं करवाया।

9 मई 2003 को 7 महीने की गर्भवती मधुमिता शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। संतोष राय और पवन पांडे के साथ अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी और भतीजे रोहितमणि त्रिपाठी को आरोपी बनाया गया। प्रदेश में बसपा सरकार थी और अमरमणि त्रिपाठी मंत्री थे। CBCID ने 20 दिन की जांच के बाद मामला CBI को सौंपा। गवाहों से पूछताछ हुई तो दो गवाह पलट गए।

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मधुमिता की बहन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं। उन्होंने याचिका दायर करते हुए केस को लखनऊ से दिल्ली या तमिलनाडु ट्रांसफर करने की अपील की। कोर्ट ने 2005 में केस उत्तराखंड ट्रांसफर कर दिया। 24 अक्टूबर 2007 को देहरादून सेशन कोर्ट ने पांचों लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अमरमणि त्रिपाठी नैनीताल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन सजा बरकरार रही।

दिसंबर 2002 में मधुमिता ने एक पत्र लिखा जो उनकी मौत के बाद उनके कमरे से मिला। उसमें उन्होंने लिखा था, ‘4 महीने से मैं मां बनने का सपना देखती रही हूं, तुम इस बच्चे को स्वीकार करने से मना कर सकते हो पर मैं नहीं कर सकती, क्या मैं महीनों इसे अपनी कोख में रखकर हत्या कर दूं? क्या तुम्हें मेरे दर्द का अंदाजा नहीं है, तुमने मुझे सिर्फ एक उपभोग की वस्तु समझा है।’ मधुमिता का यह पत्र जांच टीम के लिए निर्णायक साबित हुआ। हत्या के बाद मधुमिता की कोख में मर चुके बच्चे का DNA टेस्ट किया गया। उसका मिलान अमरमणि त्रिपाठी के DNA से हुआ तो दोनों एक मिले।

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खत्म होता राजनीतिक करियर

मधुमिता हत्याकांड में नाम आते ही अमरमणि के राजनीतिक करियर का ढलान शुरू हो गया। मायावती ने मंत्र‌िमंडल से बाहर कर दिया तो सपा में चले गए। 2007 में जेल के अंदर से चुनाव लड़ा और लक्ष्मीपुर सीट से जीत गए, लेकिन सात महीने बाद ही मधुमिता हत्याकांड में उम्रकैद की सजा मिली और पूरा राजनीतिक करियर खत्म हो गया।

चुनाव मैदान में बेटे अमनमणि को उतारा

2012 के चुनाव में सपा ने अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमनमणि को प्रत्याशी बनाया, लेकिन कौशल किशोर ने उन्हें 7,837 वोटों से हरा दिया। 2017 के चुनाव में सपा ने अमनमणि को टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय उतर गए और कौशल किशोर को 32,256 वोटों से हराकर पहली बार विधायक बन गए। इस बार अमन बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

अमनमणि पर भी हत्या का आरोप

जुलाई 2015 में अमनमणि स्विफ्ट डिजायर कार से नौतनवा से दिल्ली जा रहे थे। फिरोजाबाद में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और पत्नी सारा की मौत हो गई, जबकि गाड़ी में ही बैठे अमनमणि को एक खरोंच तक नहीं आई। सारा की मां ने हत्या का आरोप लगाते हुए CBI जांच की मांग की। CBI मामले की जांच करते हुए अमनमणि त्रिपाठी के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है।

हत्याओं में नाम आने के बावजूद महराजगंज जिले के नौतनवा में त्रिपाठी परिवार का प्रभाव कम नहीं हुआ। अमरमणि और मधुमणि जेल में हैं। अमनमणि जमानत पर बाहर हैं। अमरमणि की दोनों बेटियां तनुश्री और अलंकृता ने क्षेत्र में निकलकर प्रचार किया। 3 मार्च को वोट पड़ चुके हैं। 10 मार्च को नतीजे आएंगे। जनता यह तो मानती है कि अमरमणि अपराधी हैं, लेकिन फिर भी वोट देती है।


लेखक के बारे में

डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल ​डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगो​ष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com