भारतीय मूल के सर्जन ने ब्रिटेन की पहली दूरस्थ रोबोटिक सर्जरी का नेतृत्व किया

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भारतीय मूल के सर्जन ने ब्रिटेन की पहली दूरस्थ रोबोटिक सर्जरी का नेतृत्व किया

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 08:58 PM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 08:58 PM IST

(अदिति खन्ना)

लंदन, छह मार्च (पीटीआई) लंदन स्थित भारतीय मूल के एक सर्जन ने ब्रिटेन की पहली दूरस्थ रोबोटिक सर्जरी के तहत लगभग 2,400 किलोमीटर दूर जिब्राल्टर में मौजूद मरीजों की सफलतापूर्वक सर्जरी करके चिकित्सा जगत में इतिहास रच दिया।

लंदन क्लिनिक के ‘रोबोटिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के प्रमुख और विश्व के अग्रणी रोबोटिक यूरोलॉजिकल सर्जन प्रोफेसर प्रोकर दासगुप्ता ने कहा कि उनके दो प्रायोगिक मामले कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदारी के साथ उपयोग के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

उन्होंने बुधवार को 52 वर्षीय एक अज्ञात मरीज की प्रोस्टेटेक्टॉमी (प्रोस्टेट ग्रंथि का आंशिक या पूर्ण निष्कासन) की, इससे पहले 11 फरवरी को भी एक सफल प्रक्रिया की गई थी।

दासगुप्ता ने कहा, ‘‘एक साल की योजना के बाद यह टीम बनाकर कार्य करने, मित्रता, अंतरराष्ट्रीय दृढ़ संकल्प और जिम्मेदार एआई का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।’’

‘लंदन क्लिनिक’ ने कहा कि जिब्राल्टर स्वास्थ्य प्राधिकरण और जिब्राल्टर के सेंट बर्नार्ड अस्पताल के मूत्र रोग सर्जन जेम्स एलन और पॉल ह्यूजेस के सहयोग से, यह अस्पताल दूरस्थ रोबोट-सहायता प्राप्त टेलीसर्जरी करने वाला देश का पहला अस्पताल बन गया है।

माइक्रोपोर्ट द्वारा निर्मित ‘टूमाई रोबोटिक सिस्टम’ से की जाने वाली इस प्रक्रिया में विश्व स्तर पर रोगियों की सर्जरी में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है।

जनवरी में 62 वर्षीय पॉल बक्सटन को प्रोस्टेट कैंसर का पता चला और दोनों अस्पतालों ने उन्हें टेलीसर्जरी परीक्षण में भाग लेने का अवसर दिया।

वह लगभग 40 साल पहले ब्रिटेन से जिब्राल्टर, जो एक ब्रिटिश प्रवासी क्षेत्र है, में आकर बस गए थे और मूल रूप से सर्जरी के लिए लंदन जाने की योजना बना रहे थे।

प्रोफेसर दासगुप्ता ने याद करते हुए कहा, ‘‘मैंने श्री बक्सटन को समझाया कि अब हमारे पास इसे दूर से करने की तकनीक है। फिर समय, ऊर्जा, पैसा बर्बाद करके और परेशानी उठाकर विमान यात्रा करने की क्या जरूरत है? मैं लंदन में रहता हूं, वह जिब्राल्टर में रहते हैं।’’

सर्जरी के बाद तेजी से ठीक हो रहे बक्सटन ने कहा कि चिकित्सा इतिहास का हिस्सा बनना उनके लिए ‘सौभाग्य’ की बात है और उन्हें उम्मीद है कि इससे इसी तरह की कई और सर्जरी का मार्ग प्रशस्त होगा।

भाषा संतोष माधव

माधव