मोदी-चिनफिंग मुलाकात भारत-चीन संबंधों और ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर : विशेषज्ञ

मोदी-चिनफिंग मुलाकात भारत-चीन संबंधों और ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर : विशेषज्ञ

मोदी-चिनफिंग मुलाकात भारत-चीन संबंधों और ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर : विशेषज्ञ
Modified Date: September 11, 2026 / 08:23 pm IST
Published Date: September 11, 2026 8:23 pm IST

(केजेएम वर्मा)

बीजिंग, 11 सितंबर (भाषा) विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शनिवार को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता से दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने और ब्रिक्स सहयोग को नयी गति प्रदान करने का अवसर मिलेगा।

चिनफिंग शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नयी दिल्ली पहुंचेंगे। सात साल में भारत की यह उनकी पहली यात्रा होगी।

शिखर सम्मेलन से इतर चीनी राष्ट्रपति का प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है।

भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) की चीन शाखा के कार्यकारी निदेशक अतुल दलाकोटी दोनों नेताओं की द्विपक्षीय वार्ता को लेकर बहुत आशान्वित हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने अपनी पिछली मुलाकातों के दौरान ‘‘बेहतर तालमेल’’ का प्रदर्शन किया था और उनकी बातचीत के नतीजे आम तौर पर सकारात्मक रहे थे।

दलाकोटी ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि जब भी ये दोनों नेता मिले हैं – और वे कई बार मिले हैं – तो नतीजे हमेशा बहुत अच्छे रहे हैं। इसलिए, उनके बीच बेहतर आपसी तालमेल है। भारत ने इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए कड़ी मेहनत की है। और अगले साल चीन की बारी है।’’

भारत ने एक जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली।

दलाकोटी ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए शांतिपूर्ण सीमा एक ‘जरूरी शर्त’ है, जबकि व्यापार में बेहतर संतुलन से दोनों देशों के बीच व्यापार को मौजूदा 155 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर अगले 15 से 20 साल में 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने में मदद मिल सकती है।

चीन स्थित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान में विकासशील देशों के मामलों के अनुसंधानकर्ता वांग योमिंग ने कहा, ‘‘चीन और भारत न केवल करीबी पड़ोसी हैं, बल्कि ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य और उसमें अहम भूमिका निभाने वाले देश भी हैं। उनके रिश्तों की स्थिति का इस समूह के विकास पर सीधा असर पड़ता है।’’

दोनों देशों ने ब्रिक्स कार्यक्रमों की मेजबानी में एक-दूसरे का समर्थन करने की बात कही है। इस साल भारत के पास इसकी अध्यक्षता है और अगले साल चीन यह जिम्मेदारी संभालेगा।

वांग ने ‘चाइना डेली’ से कहा, ‘‘बहुपक्षीय मंच द्विपक्षीय बातचीत के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं, जबकि द्विपक्षीय संबंधों में सुधार से बहुपक्षीय व्यवस्थाओं के भीतर तालमेल बेहतर हो सकता है।’’

भाषा धीरज सुभाष

सुभाष


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