दक्षिण सूडान में विस्थापित सहायता से वंचित, सरकार और विपक्ष ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप

Ads

दक्षिण सूडान में विस्थापित सहायता से वंचित, सरकार और विपक्ष ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप

  •  
  • Publish Date - April 28, 2026 / 04:05 PM IST,
    Updated On - April 28, 2026 / 04:05 PM IST

चुइल (दक्षिण सूडान), 28 अप्रैल (एपी) प्रत्यक्षदर्शियों और सहायता संगठनों ने दावा किया है कि संघर्ष से विस्थापित होकर दक्षिण सूडान के एक दूरस्थ गांव में शरण लेने वाले लोगों तक जीवनरक्षक मानवीय सहायता नहीं पहुंच पाई, जबकि वहां मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है।

न्यातिम नामक इस अलग-थलग इलाके में हाल के सप्ताहों में पहुंचे लोगों ने बताया कि वहां भोजन की भारी कमी है और स्वच्छ पानी भी उपलब्ध नहीं है। यह क्षेत्र इतना दुर्गम है कि वहां से मदद के लिए स्टारलिंक इंटरनेट कनेक्शन का उपयोग कर संपर्क साधा गया।

सहायता कार्यकर्ताओं ने जब आपातकालीन राहत पहुंचाने की अनुमति के लिए दक्षिण सूडान के अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्हें अनुमति नहीं दी गई। भूख से मौतों की खबरों के बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ।

दक्षिण सूडान में डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के मिशन प्रमुख यशोवर्धन ने कहा, “स्थानीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर और सैन्य अधिकारियों की ओर से भी ‘नहीं’ कहा गया। यह स्थिति तब है जब लोग जीवित रहने के लिए पत्ते और जड़ें खाने को मजबूर हैं।”

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने भी एजेंसी एपी को बताया कि उसे स्थानीय और राष्ट्रीय अधिकारियों के साथ कई बार संपर्क के बावजूद सहायता पहुंचाने से रोक दिया गया है।

संगठन के देश निदेशक अधम एफेंदी के अनुसार, यह स्थिति लंबे समय से चले आ रहे मानवीय संकट को और गहरा कर रही है, जबकि सरकार और विपक्ष एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।

दक्षिण सूडान में हिंसा और राजनीतिक टकराव थम नहीं रहे हैं, जहां के लोगों ने पहले सूडान से आजादी के लिए वर्षों तक संघर्ष किया था और अब वे आपस में ही संघर्ष में उलझ गए हैं। स्थिति यह है कि जो भी पक्ष राहत और सहायता वितरण पर नियंत्रण रखता है, उस पर दूसरे पक्ष को सहायता से वंचित करने के आरोप लगते रहते हैं, और इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है।

इन दिनों संघर्ष में फिर से तेजी आई है, खासकर तब से जब लंबे समय से राष्ट्रपति साल्वा कीर के प्रतिद्वंद्वी रहे रिक मचार को पिछले वर्ष प्रथम उपराष्ट्रपति पद से निलंबित कर कथित साजिश के आरोप में घर में नजरबंद कर दिया गया था।

दोनों नेता पहले उस गृहयुद्ध में आमने-सामने रहे हैं, जिसमें अनुमानित रूप से चार लाख लोगों की मौत हुई थी। 2018 के शांति समझौते के बाद दोनों को एक कमजोर संयुक्त सरकार में शामिल किया गया था, लेकिन शांति स्थायी नहीं रह सकी।

दिसंबर में मचार समर्थक विपक्षी बलों ने जोंगलेई राज्य में सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया था जिसके बाद अगले महीने सरकारी बलों ने जवाबी कार्रवाई की।

सात फरवरी को सरकारी सैनिक लंकिएन शहर के बाहरी इलाके तक पहुंच गए, जहां कुछ दिन पहले एक हवाई हमले में डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा संचालित अस्पताल को निशाना बनाया गया था। स्थानीय निवासियों के अनुसार, शहर में भारी गोलाबारी हुई और बाद में बख्तरबंद वाहनों के साथ सैनिकों ने शहर में प्रवेश किया।

इस पूरे संघर्ष के बीच मानवीय संगठनों का कहना है कि राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं और आम नागरिकों को भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है।

एपी मनीषा नरेश

नरेश