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Trump On India vs Pakistan: वाशिंगटन डीसी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के संभावित युद्ध को लेकर कहा है कि उन्होंने कई मौकों पर संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो इस क्षेत्र में युद्ध छिड़ सकता था और करोड़ों लोग मारे जाते। ट्रंप ने कहा, “मैंने 8 युद्ध रोके हैं, अन्यथा परिस्थितियां और भी भयावह हो सकती थीं। अगर समय पर कदम नहीं उठाए जाते तो यह परमाणु युद्ध तक भी पहुँच सकता था।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के संभावित युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक 8 युद्धों को रोका, और उनके समय पर हस्तक्षेप के बिना यह स्थिति इतनी गंभीर हो सकती थी कि करोड़ों लोग मारे जाते और परमाणु युद्ध तक का खतरा बन सकता था। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उनकी रणनीति और निर्णयों ने वैश्विक स्तर पर संघर्ष को रोकने में अहम भूमिका निभाई।
ट्रंप ने यह भी बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भी स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया था और कहा था कि अगर कदम नहीं उठाए जाते तो बड़ी तबाही हो सकती थी। ट्रंप ने इस बयान में स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य हमेशा क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज अपने दूसरे कार्यकाल का दूसरा ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ भाषण अमेरिकी संसद में दिया। यह कार्यक्रम सुबह 7:30 बजे शुरू हो चुका है और इसी दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के संभावित युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। राष्ट्रपति का संबोधन देश की आंतरिक और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। ट्रंप के भाषण में विशेष रूप से ईरान, गाजा संकट और टैरिफ नीति पर बयान दिए जाने की संभावना है।
भाषण के दौरान एक और अहम पहलू यह है कि जेफ्री एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की कई पीड़िताएं संसद में मौजूद हैं। यह पहली बार है जब इस मामले की पीड़िताओं की उपस्थिति राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक कार्यक्रम में दर्ज की गई है। विपक्षी सांसदों ने भी इन्हें आमंत्रित किया है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल और चर्चाएं बढ़ सकती हैं। ट्रंप और एपस्टीन लंबे समय तक दोस्त रहे हैं, हालांकि ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि उन्हें एपस्टीन के किसी गलत काम की जानकारी नहीं थी।
राष्ट्रपति ट्रंप का यह भाषण उनके कार्यकाल की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को जनता के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर भी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भाषण में उठाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्दे, विशेषकर ईरान-गाजा संकट और व्यापार नीति, न केवल अमेरिकी राजनीति बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।