9/11 को याद करते समय हमारी स्मृति में क्या रहता है ?

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9/11 को याद करते समय हमारी स्मृति में क्या रहता है ?

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  • Publish Date - September 11, 2026 / 04:10 PM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 04:10 PM IST

( जेनिफर तालारिका, लाफायते कॉलेज )

ईस्टन (अमेरिका), 11 सितंबर (द कन्वरसेशन) क्या आपको याद है कि 25 साल पहले 11 सितंबर के आतंकवादी हमलों के बारे में जब आपको पता चला था तब आप कहां थे और क्या कर रहे थे?

क्या आपको याद है कि आपने टेलीविजन पर क्या देखा था या उस समय आपको कैसा महसूस हुआ था? क्या आपकी यादें इतनी स्पष्ट हैं कि आपको लगता है कि उनमें दर्ज हर विवरण बिल्कुल सही है?

स्मृति पर शोध करने वाले के तौर पर मैं जानता हूं कि लंबे समय तक बनी रहने वाली और बेहद जीवंत ‘फ्लैशबल्ब मेमोरी’ आमतौर पर रोजमर्रा की घटनाओं से जुड़ी होती है, जैसे काम पर जाते समय या खाना बनाते समय की यादें। ये यादें खास इसलिए बन जाती हैं क्योंकि वे किसी दूर की और असाधारण सार्वजनिक घटना के बारे में जानकारी मिलने के क्षण से जुड़ी होती हैं।

—– किसी असाधारण घटना की स्मृति —–

फ्लैशबल्ब मेमोरी किसी समाचार योग्य घटना में सीधे शामिल होने की याद नहीं होती। इसके बजाय, यह उस सटीक क्षण और आसपास की परिस्थितियों की याद होती है जब किसी व्यक्ति को उस घटना के बारे में जानकारी मिली थी।

उदाहरण के लिए, अगर आपने भूकंप को स्वयं महसूस किया हो, तो आपकी याद में भूकंप आने के समय आप क्या कर रहे थे, कहां थे, किसके साथ थे और उस समय आपके विचार और भावनाएं क्या थीं, जैसी बातें शामिल हो सकती हैं।

लेकिन अगर जब कोई व्यक्ति हजारों किलोमीटर दूर आए भूकंप के बारे में जानने के क्षण को भी उतनी ही मजबूती से याद रखता है, तो यह फ्लैशबल्ब मेमोरी की विशेषता है।

फ्लैशबल्ब मेमोरी और रोजमर्रा के अनुभवों से जुड़ी सामान्य यादों की तुलना में मेरे सहयोगी और मैंने पाया कि दोनों प्रकार की यादों में लोग समय के साथ उन विवरणों को भूलने लगते हैं, जिन्हें उन्होंने शुरुआत में अपनी यादों के लिखित विवरण में शामिल किया था। दोनों समूहों में ऐसी बातें जोड़ने की प्रवृत्ति भी समान रही, जो शुरुआती जानकारी से मेल नहीं खाती थीं।

हालांकि, फ्लैशबल्ब मेमोरी उतनी सटीक नहीं होती, जितना लोग मानते हैं, फिर भी इसकी असाधारण विशेषताएं इसे सामान्य यादों से अलग बनाती हैं।

—– अन्य अमेरिकियों से जुड़ाव —–

जब 9/11 जैसी कोई घटना होती है, तो वह न केवल लोगों का ध्यान खींचती है बल्कि अक्सर गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया भी पैदा करती हैं।

हर दिन कई महत्वपूर्ण खबरें आती हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही फ्लैशबल्ब मेमोरी बन पाती हैं।

शोध से पता चलता है कि किसी घटना को फ्लैशबल्ब मेमोरी बनने के लिए वह व्यक्ति के सामाजिक समूह या उसकी पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण घटना होनी चाहिए। समुदाय में उस घटना पर चर्चा करना और उसे याद करना इस विचार को मजबूत करता है कि वह घटना महत्वपूर्ण थी।

उदाहरण के लिए, जब दादा-दादी अपनी ऐसी यादें अगली पीढ़ी के साथ साझा करते हैं, तो वे बताते हैं कि कौन-सी ऐतिहासिक घटनाएं महत्वपूर्ण हैं और उनसे क्या सीख ली जा सकती है।

घटना की स्पष्ट और विस्तृत याद किसी व्यक्ति के अपने समूह से जुड़ाव को मजबूत करती है। 9/11 के संदर्भ में, उस दिन की अपनी याद साझा करना कई लोगों के लिए देश के प्रति जुड़ाव और अन्य अमेरिकियों के साथ एकता दिखाने जैसा हो सकता है।

उस दिन आप कहां थे और क्या कर रहे थे, यह बताना आपके निजी इतिहास को व्यापक इतिहास से जोड़ता है। यह एक तरह से उस घटना के गवाह बनने जैसा है।

समय बीतने के साथ, जिन लोगों ने घटना को स्वयं देखा था, वे अपनी कहानियां साझा करते हैं। बाद में आने वाली पीढ़ियां इन कहानियों को उन घटनाओं को समझने के माध्यम के रूप में सुनती हैं, जिन्हें उन्होंने खुद नहीं देखा था।

इन लोगों के लिए 9/11 को याद करना केवल यह समझना नहीं है कि क्या हुआ था, बल्कि यह समझना भी है कि उसका क्या अर्थ था। साल दर साल व्यक्तिगत संबंध रखने वाले लोगों की संख्या कम होती जाती है और घटना धीरे-धीरे इतिहास का हिस्सा बन जाती है।

—– ‘कभी मत भूलना’ का क्या अर्थ है? —–

त्रासदियों के बाद अक्सर लोगों से ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं को ‘याद रखने’ या ‘कभी न भूलने’ की अपील की जाती है।

‘रिमेंबर द अलामो’, ‘रिमेंबर पर्ल हार्बर’ और ‘कभी होलोकॉस्ट को न भूलें’ जैसे नारे इसके उदाहरण हैं। इसी तरह 9/11 हमलों के बाद ‘कभी मत भूलना’ एक गंभीर स्मरण संदेश बन गया।

ऐसे संदेश अक्सर उन लोगों को सम्मान देने का आह्वान होते हैं, जो सीधे तौर पर प्रभावित हुए थे। 9/11 के मामले में यह, हादसे में जान गंवाने वालों को याद करने और उनके पीछे छूट गए परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने का संदेश है।

कुछ लोगों के लिए यह व्यक्तिगत शोक की प्रक्रिया है, जबकि दूसरों के लिए यह उन लोगों के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है, जिन्हें वे जानते नहीं थे लेकिन याद करना चाहते हैं।

जैसे-जैसे घटना और उससे जुड़े लोग अतीत का हिस्सा बनते जाते हैं, स्मृति की अपील अधिक व्यापक हो जाती है। इसका उद्देश्य सीख लेना और भविष्य के कदमों को दिशा देना होता है। 9/11 मेमोरियल और म्यूजियम जैसे सार्वजनिक स्मारक इसी तरह की स्मृति को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए हैं।

9/11 को याद करने का अर्थ केवल तथ्यों को याद करना भी हो सकता है। अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर आतंकवादी हमला हुआ था। यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93 के यात्रियों ने पेंसिल्वेनिया के ग्रामीण इलाके में विमान ले जाने पर जोर दिया। ग्रामीण इलाके में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से वॉशिंगटन पर होने वाला एक अन्य हमला टल गया।

ये उस घटना को जानने के मुख्य तथ्य हैं। लेकिन कई मायनों में इन्हें याद रखना सबसे कम महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जानकारी अन्य स्रोतों से आसानी से उपलब्ध है।

9/11 को याद करने का अर्थ इस बात पर निर्भर करता है कि याद करने वाला कौन है और उससे क्या याद करने के लिए कहा जा रहा है। न्यूयॉर्क, वर्जीनिया और पेंसिल्वेनिया के शैंक्सविले में सीधे प्रभावित लोगों की दर्दनाक यादें उन लोगों की यादों से अलग हैं, जिन्होंने दूर रहते हुए उस घटना के बारे में जाना था।

कुल मिलाकर 9/11 को याद करने का हर तरीका महत्वपूर्ण है।

द कन्वरसेशन मनीषा नरेश

नरेश