नईदिल्ली: सरकार ने छोटे करदाताओं और निवेशकों को राहत देते हुए इनकम टैक्स प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई बड़े फैसलों का ऐलान किया है। (Budget 2026 middle class) इन बदलावों का मकसद टैक्स अनुपालन को सरल बनाना और करदाताओं की परेशानियां कम करना है।
अब कम या शून्य TDS सर्टिफिकेट के लिए करदाताओं को असेसिंग ऑफिसर के पास आवेदन देने की जरूरत नहीं होगी।(Budget 2026 middle class) इसके लिए एक ऑटोमैटिक, रूल-बेस्ड सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे छोटे करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी और टैक्स प्रक्रिया और सरल होगी।
निवेशकों के लिए डिपॉजिटरी अब Form 15G और Form 15H स्वीकार करेंगी। ये फॉर्म सीधे संबंधित कंपनियों को भेजे जाएंगे। (Budget 2026 middle class) इससे उन निवेशकों को खास फायदा होगा, जिनके पास कई कंपनियों की सिक्योरिटीज़ हैं और जिन्हें बार-बार फॉर्म जमा करने की जरूरत पड़ती थी।
सरकार ने घोषणा की है कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। (Budget 2026 middle class) वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए सरकार ने नॉन-डेट रिसीट्स ₹36.5 लाख करोड़ और नेट टैक्स रिसीट्स ₹28.7 लाख करोड़ का अनुमान रखा है।
(Budget 2026 middle class) शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों पर लगने वाला TCS 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे विदेश में पढ़ाई और इलाज कराने वालों को राहत मिलेगी।
सरकार ने संशोधित रिटर्न (Revised Return) फाइल करने के लिए अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है। अब करदाता नाममात्र शुल्क देकर संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकेंगे।
ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की अंतिम तारीख: 31 जुलाई
नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्ट मामलों के लिए: 31 अगस्त
एनआरआई द्वारा संपत्ति बिक्री के मामलों में अब TDS निवासी खरीदार द्वारा काटा जाएगा। इसके साथ ही TAN लेने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है, जिससे प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन की प्रक्रिया सरल हो जाएगी। सरकार का कहना है कि इन कदमों से टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी, डिजिटल और करदाताओं के अनुकूल बनेगा।
गौरतलब है कि एक फरवरी यानि देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला दिन आज को माना जाता है। क्योंकि आज संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 9वां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं। इस बजट से जहां टैक्सपेयर्स को राहत की उम्मीद है तो वहीं मिडिल क्लास से लेकर गांव-किसान की नजरें भी सरकार के इस बजट पर टिकी हैं। निवेशक इस बात पर नजर लगाए हैं कि सरकार ग्रोथ और वित्तीय संतुलन के बीच कैसा तालमेल बैठाती है।
आपको बता दें कि यह बजट ऐसे वक्त में आ रहा है जब एक तरफ देश की घरेलू मांग मजबूत बताई जा रही है, तो दूसरी तरफ दुनिया में उथल-पुथल का माहौल है। अमेरिकी टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।
बजट से ठीक पहले संसद में पेश इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी तस्वीर रखी। वर्किंग-एज आबादी का फायदा मिल रहा है, लेकिन हेल्थ और रोजगार की बड़ी चुनौती भी सामने है। आगामी वित्त वर्ष में 6.8% से 7.2% ग्रोथ का अनुमान है। घरेलू मांग मजबूत हुई है, फिलहाल, हर वर्ग जानना चाहता है कि क्या बजट 2026 में क्या होने वाला है।