मुंबई, सात जुलाई (भाषा) एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट ने सरकार से विमान ईंधन (एटीएफ) को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग की है।
इन एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि इससे उनके परिचालन खर्च में कमी आएगी।
वर्तमान में राज्यों की ओर से विमान ईंधन पर उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) लगाया जाता है। किसी भी एयरलाइन के परिचालन खर्च का एक बड़ा हिस्सा विमान ईंधन पर होता है।
एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस’ (एफआईए) ने कहा है कि भारतीय विमानन क्षेत्र इस समय कई असाधारण चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण बढ़ता तनाव, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और रुपये के कमजोर रहने जैसी परिस्थितियां शामिल हैं।
एफआईए ने पिछले महीने नागर विमानन मंत्रालय को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘मौजूदा हालात की वजह से परिचालन लागत में ईंधन का हिस्सा अब 30-40 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 55-60 प्रतिशत हो गया है, जिससे भारतीय एयरलाइंस के लिए परिचालन कर पाना आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है।’’
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यासिर अजय
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