वित्त मंत्रालय ने भारतीय समुद्री बीमा पूल के तहत सुरक्षा एवं क्षतिपूर्ति बीमा उत्पाद पेश किया

वित्त मंत्रालय ने भारतीय समुद्री बीमा पूल के तहत सुरक्षा एवं क्षतिपूर्ति बीमा उत्पाद पेश किया

वित्त मंत्रालय ने भारतीय समुद्री बीमा पूल के तहत सुरक्षा एवं क्षतिपूर्ति बीमा उत्पाद पेश किया
Modified Date: July 30, 2026 / 10:00 pm IST
Published Date: July 30, 2026 10:00 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने बृहस्पतिवार को भारतीय समुद्री बीमा पूल (बीएमआईपी) के तहत देश का पहला सरकारी गारंटी के साथ सुरक्षा एवं क्षतिपूर्ति (पीएंडआई) बीमा उत्पाद पेश किया। इस उत्पाद को न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने तैयार किया है।

पी एंड आई बीमा पॉलिसी समुद्री परिवहन में तीसरे पक्ष की देनदारियों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करती है। भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल यानी भारतीय समुद्री बीमा पूल, समुद्री जोखिमों के लिए घरेलू बीमा क्षमता उपलब्ध कराने वाली साझा बीमा व्यवस्था है।

इस मौके पर वित्तीय सेवा सचिव संजय लोहिया ने भारतीय नौवहन निगम लि. को पहली सुरक्षा और क्षतिपूर्ति बीमा पॉलिसी सौंपी।

वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह बीमा चालक दल और कार्गो से जुड़ी देनदारियों, प्रदूषण से संबंधित दायित्वों, जहाज के मलबे को हटाने की लागत तथा 24 घंटे उपलब्ध बंदरगाह प्रतिनिधि नेटवर्क जैसी तीसरे पक्ष की देनदारियों के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। पूल की संयुक्त बीमा क्षमता के माध्यम से इसमें 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक की क्षतिपूर्ति सीमा उपलब्ध है।

कार्यक्रम में नौवहन महानिदेशक श्याम जगन्नाथन, वित्तीय सेवा विभाग के अतिरिक्त सचिव देबाशीष प्रुस्ती, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हितेश जोशी, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी की चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गिरिजा सुब्रमणयन तथा भारतीय नौवहन निगम लि. के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक बिनेश कुमार त्यागी मौजूद थे।

बयान के अनुसार, 12 मई, 2026 को संप्रभु गारंटी के साथ बीएमआईपी के परिचालन शुरू होने के बाद से इस व्यवस्था को बाजार में अच्छा समर्थन मिला है। इसने भारतीय पक्षों को निर्बाध युद्ध जोखिम बीमा उपलब्ध कराने के अपने प्रमुख उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

बीएमआईपी शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान की तुलना में युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम में लगभग 35 से 40 प्रतिशत की कमी आई है।

बीस जुलाई, 2026 तक इस पूल के तहत कार्गो युद्ध जोखिम और जहाज के ढांचे से जुड़े युद्ध जोखिम से संबंधित कुल 1,608 बीमा पॉलिसी जारी की जा चुकी हैं।

मंत्रालय ने कहा कि बीएमआईपी व्यवस्था समुद्री युद्ध जोखिम बीमा की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने, घरेलू ‘अंडरराइटिंग’ क्षमता विकसित करने और भारतीय नौवहन एवं व्यापार क्षेत्र का विश्वास बढ़ाने में सहायक है। इसमें सुरक्षा एवं क्षतिपूर्ति बीमा को शामिल करने से भारत की समुद्री जोखिम प्रबंधन व्यवस्था और मजबूत होगी तथा समुद्री बीमा प्रणाली सुदृढ़ होगी।

मंत्रालय ने कहा कि यह पहल मजबूत घरेलू बीमा क्षमताओं के निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इससे विशेषीकृत बीमा समाधानों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम होगी और भारत के समुद्री व्यापार से सृजित मूल्य देश की अर्थव्यवस्था में ही बना रहेगा। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के व्यापक लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।

भाषा रमण अजय

अजय


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